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दामन की पहल को रफ़्तार 24 न्यूज़ का सलाम....

Thursday, 6 December 2012 0 comments


रफ़्तार 24 न्यूज़। इंटरनेट डेस्क


एक ओर नारी को अबला न समझने पर जोर दिया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर हमारे देश का कानून महिलाओं को हमेशा अबला की नजर से देखता है। बात चाहे जो भी हो विवाहिता अगर दहेज का मुकदमा कर दे तो पति का पूरा खानदान जेल पहुंच जाता है। जांच बाद में होती है, जेल ही हवा पहले खिलाई जाती है। 
अगर कोई मर्द किसी औरत को प्रताड़ित करे तो समाज आगे आएगा, तमाम संगठन आन्दोलन शुरू कर देंगे। सच्चाई बाद में सामने आएगी, आरोपी को दोषी पहले ही ठहराया जाएगा। समाज में उसे कू्ररता भरी नजरों से देखा जाएगा। 

क्या हर मर्द महिलाओं को प्रताड़ित ही करता है? हर महिला आज भी अबला है? 

ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब मांगने के लिए अग्रसर संस्था दामन तथा इसके संचालक मनुज गुप्ता हो रफ़्तार 24 न्यूज़ सलाम करता है। 

हमारा मकसद किसी संस्था या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है, फिर भी अगर किसी की भावनाऐं आहत हों तो इसके लिए हम क्षमा चाहतें हैं। आप अपनी आपत्ति editor@raftaar24news.com पर ईमेल करें। प्रकाशित करने में हमें बहुत खुशी होगी।- एडिटर 

घरेलु हिंसा अधिनियम विरोध में सांकेतिक शव यात्रा एवं हस्ताक्षर अभियान!

Sunday, 28 October 2012 1 comments


घरेलु हिंसा अधिनियम 2005 के विरोध में सांकेतिक शव यात्रा एवं हस्ताक्षर अभियान

प्रदर्शन में शामिल छात्र/छात्राएं व् अन्य  नागरिक। 
कानपुर। घरेलु हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, तमाम विरोधो के बाद महिला संगठनों के दबाव वश 26 अक्टूबर 2006 को नियुक्त किया गया | 13सितम्बर 2005 को राष्ट्रपति से अनुमति मिलने के बाद भी इस अधिनियम हेतु पर्याप्त कदम उठाये जाने के लिए 13 महीने 13 दिन बाद कानून लागू हुआ और जबसे परिवारों की तेरहवी मनवा  रहा है | किन्तु फिर भी जो क़ानून मुख्यतया महिलाए, फिर चाहे वो पत्नी रूप में हो या फिर किसी और सम्बन्ध में (Live-in-Relationship) में रह चुकी हो, को संरक्षण के लिए थे, आज भ्रष्टाचार, दुरूपयोग एवं पुरुष विरोधी बन कर रह गए हैं |

कहने को तो ये अधिनियम जनतांत्रिक  विधान है परन्तु  गंभीरता से अध्ययन एवं इसका वर्त्तमान समय में दुष्परिणाम से बहुत स्पष्ट है कि यह जनतांत्रिक विधान नहीं जनतंत्र का परिहास है क्योंकि जनतंत्र में रहकर पुरुषों कि बलि चढाने वाले कानून स्वाभाविक ही जनतांत्रिक नहीं हो सकते |
            अधिनियम की धारा ३ के तहत "घरेलु हिंसा" की परिभाषा में स्पष्ट कहा गया है की -" इस अधिनियम के प्रयोजन हेतु, प्रत्यर्थी का कोई कृत्य, लोप आचरण घरेलु हिंसा गठित करेगा अगर यह -
(क) व्यथित व्यक्ति के, चाहे मानसिक अथवा शारीरिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन, अंग अथवा भलाई की अपहानि करता है अथवा क्षति पहुँचाता है अथवा संकटापन्न करता है अथवा करने का प्रयास करता है और इसमें शारीरिक दुरूपयोग, लैंगिक दुरूपयोग, मौखिक और भावात्मक दुरूपयोग और आर्थिक दुरुपयोग शामिल है; अथवा 
(ख)  व्यथित व्यक्ति को, इस दृष्टि से सताता है, अपहानि करता है, क्षति पहुँचाता है अथवा संकटापन्न करता है की  उसको  अथवा उससे सम्बंधित  किसी  अन्य  व्यक्ति को किसी दहेज़  अथवा  अन्य संपत्ति  अथवा मूल्यवान  प्रतिभूति  की किसी अवैध मांग को पूरा करने क लिए मजबूर करे ; अथवा 
(ग) व्यथित व्यक्ति अथवा उससे सम्बंधित किसी व्यक्ति पर खंड (क) अथवा खंड (ख) में वर्णित किसी आचरण क द्वारा धमकी देने का प्रभाव रखता है; अथवा 
(घ) व्यथित व्यक्ति को चाहे शारीरिक अथवा मानसिक अन्यथा शती पहुँचाता है अथवा अपहानि कारित करता है |
परिभाषा से साफ़ स्पष्ट होता है की घरेलू हिंसा पति और पत्नी दोनों के लिए सामान है किन्तु अगर महिला द्वारा घरेलू हिंसा की जा रही हो तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का कोई प्रावधान न तो पति के पास है, न सास-ससुर के पास न ननद के पास | ऐसा क्यों? दामन का समाज से ये ही प्रश्न है की क्या महिला का अर्थ सिर्फ बहु या पत्नी ही है,  सास या ननद नहीं ? क्या सिर्फ सास अत्याचार कर सकती है बहु नहीं ?
  •  क्या ये न्याय हित में मज़ाक नहीं की बिना किसी सबूत, साक्ष एवं गवाह के एक महिला के बयान मात्र पर पति और उसके माँ बाप एवं कुवारी बहन को कानूनी आतंकवाद का दंश झेलना पड़े ?
  • क्या विदेशों में नौकरी कर रहे पति को झूटे मुकदमों की वजह से नौकरी से हाथ धोना पड़े, ऐसा क़ानून उचित है ? और क्या ये देश के विकास में बाधक नहीं है ?
  • 2011 में 47746 महिलाओं की तुलना में 87839 पुरुषों ने आत्महत्या की, इसके बाद भी यह कहना की सिर्फ महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है ये कहाँ का न्याय है
इस प्रदर्शन के जरिये केंद्र सरकार एवं कानपूर नगर में जनता से अपील की गयी कि सत्य कटु अवश्य होता है पर सत्य पर पर्दा ना डाले | सच्चाई पढ़े एवं जाने | घरेलू हिंसा क़ानून के आने के बाद इससे कितने घर बचे और कितने टूटे, ये भी सोचने का विषय है |
निम्न मांगे उठायीं गयीं।
  • पति एवं पत्नी शब्द हटा कर 'जीवनसाथी' प्रयोग करें |
  •  पुरुष एवं महिलाए हटा कर 'व्यक्ति' प्रयोग करें |
  • व्यथित व्यक्ति फिर वो महिला हो या पुरुष, दोनों के लिए आश्रय गृह की सुविधा प्रदान करें |
  • पारिवारिक मुकदमों को तुरंत निस्तारित करें एवं पुरुषों की पीड़ा को भी न्यायालय सुने |
  • गुज़ारा भत्ता की भिन्न भिन्न धारा जैसे 125 (सी०आर०पी०सी०), घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20, 23, हिन्दू विवाह अधिनियम की धरा 24, 25 को एक करें |
  • जब तलाक१२५ (सी०आर०पी०सी०), दहेज़ प्रतिषेध धारा 3/4, 498A पहले ही लगा हो तो अलग से घरेलू हिंसा लगाने पर रोक  लगे |
  • मुकदमें झूठे पाए जाने पर पति एवं उसके परिवार को मान हानि का मुआवजा पत्नी एवं उसके परिवार से मिले तथा महिला एवं उसके परिवार को उचित दंड मिले |  
बैठक में सबका मानना है की घरेलू हिंसा अधिनियम में संशोधन की सख्त जरूरत है और साथ ही समाज में  पुरुषों को  दरिंदा समझने वाली मानसिकता को बदलना बहुत आवश्यक है | पति-पत्नी एक  दूसरे के  पूरक  हैदुश्मन नहीं | क़ानून  का डर दोनों पक्षों में बराबर लाने से ही इसका दुरुपयोग बंद होगा |

कार्यक्रम की अगवाई  श्री  अशोक  जैन  एवं  अरविन्द  कुशवाहा  ने की | 'दामन'  संस्था के फाउंडर  मनुज  गुप्ता के अलावा अनुपम दुबे, प्रदीप बाजपाई, अभिषेक श्रीवास्तव, दुर्गेश शुक्ल, लखनऊ से  आई "ऑफ़ द कोर्ट"  की  अध्यक्षा डा०  श्रीमती  इंदु सुभाष, 'सेव फॅमिली फाउन्डेशन'  के  यक्ष  प्रताप  सिंहएवं 'पति परिवार कल्याण समिति' के सदस्य अनिल अनाडी, मानिक मजूमदार आदि मौजूद थे | अनिल अनाडी ने अपनी  कविताओ के माध्यम से समा बांधते  हुए पत्नी चालीसा भी सुनाई  | इस अवसर पर"स्त्रियों के लिए कर्त्तव्य शिक्षा" पुस्तक  का  वितरण भी किया गया |
(दामन  संस्था द्वारा भेजे गए ईमेल पर आधारित)

15 रिश्तेदारों ने किया गैंग रेप!

Sunday, 21 October 2012 0 comments


 

कानपुर। उत्तर प्रदेश में एक नाबालिग लड़की ने अपने ही रिश्तेदारों पर गैंगरेप का आरोप लगाते हुए पुलिस से मदद की गुहार लगाई है। मामला कानपुर जिले के शगुनपुर गांव का है। पीडित 17 वर्षीय लड़की ने पुलिस में अपने ही 15 रिश्तेदारों के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई है। 

हालांकि, पुलिस ने मामले में लड़की के साथ दुष्कर्म से इनकार किया है। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह आरोप गलत है। लड़की की मैडिकल रिपोर्ट से सामने आया कि उसके साथ कोई रेप नहीं हुआ है। उन्होंने इसे आपसी रंजिश का मामला कहा है। 

पुलिस का कहना है कि लड़की जिन लोगों पर आरोप लगा रही है वो उसके रिश्तेदार ही हैं। लड़की के भाई का उन रिश्तेदारों से झगड़ा हुआ था जिसके चलते वे उन्हें गलत केस में फंसाना चाहती है। कानपुर के डीआईजी अमिताभ यश के अनुसार लड़की के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। 

हालांकि पुलिस लड़की के रिश्तेदारों से अभी भी बाताचीत करने में जुटी है।Source: patrika

जायसवाल संग 'शादी' पर भड़की राखी

Friday, 5 October 2012 0 comments

wedding with jaiswal leaves rakhi livid
जायसवाल संग 'शादी' पर भड़की राखी
कानपुर। यदि केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल यह सोचते हैं कि पुरानी पत्नियां अपना आकर्षण खो देती हैं तो भाजपा में उनके कुछ 'मित्रों' ने उनके लिए नई पत्‍‌नी ढूंढ ली।
बृहस्पतिवार को कानपुर में एक पोस्टर दिखा, जिसमें एक तरफ श्रीप्रकाश जायसवाल सेहरा बांधे और दूसरी तरफ फिल्म अभिनेत्री राखी सावंत शादी के जोड़े में दिख रही थी। इस पोस्टर में लिखा था, नई शादी नया मजा।

इस मौके पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने ढोल-मंजीरे बजाकर शादी की खुशिया मनाई और बाद में जायसवाल के पुतले को आग भी लगाई।
लेकिन शुक्रवार को इस मजाक रूपी विरोध प्रदर्शन से राखी सावंत भड़क उठी। राखी ने भाजपा नेताओं से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि क्यों नहीं वे जायसवाल की शादी स्मृति ईरानी या हेमा मालिनी से करा देते हैं।
गौरतलब है कि जायसवाल ने ट्वंटी-20 विश्व कप में भारत की पाकिस्तान पर जीत के बाद कहा था कि नई-नई जीत और नई-नई शादी का अपना महत्व होता है, जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, जीत पुरानी होती जाती है और उसमें वह मजा नहीं रहता है।
इसी प्रकार जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, पत्‍‌नी पुरानी होती जाती है, वैसे-वैसे उसका मजा भी पुराना होता जाता है।Source: Dainik Jagran

छेड़छाड़ से तंग छात्रा ने लगाया मौत को गले, आरोपी गिरफ्तार

Thursday, 20 September 2012 0 comments


कानपुर. एक शोहदे द्वारा छेड़छाड़ से तंग आकर रविवार को खुद को आग लगा लेने वाली किशोरी आज कानपुर के हैलेट अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत की जंग हार गयी।


जानकारी के मुताबिक, कई दिनों से एक युवक द्वारा की जा रही छेड़छाड़ से तंग आकर एक किशोरी ने रविवार को नौबस्ता इलाके में खुद को आग लगा के खुदखुशी का प्रयास किया। वह ८० फीसद से ज्यादा जल गयी थी।

कानपुर के नौबस्ता थाने की पुलिस ने मृतका के पिता रमाकांत द्वारा दी गयी तहरीर पर शोहदे युवक रोहित उर्फ़ छोटू के खिलाफ खुदखुशी के लिए उकसाने का मुकदमा तो दर्ज कर आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। Source: Dainik Bhaskar


स्लग - विकास खंड कार्यालय के बंद कमरे से कंप्यूटर चोरी

Tuesday, 11 September 2012 0 comments


त्रिपुरेश नारायण अवस्थी


कानपुर देहात - समाचार  

खबर वाकई दिलचस्प है कानपुर देहात जनपद के मलासा विकास खंड कार्यालय कक्ष में बिना सेंध लगे बिना कोई ताला टूटे कंप्यूटर कक्ष से कंप्यूटर गायब हो गये अब यह कंप्यूटर चोरी हुए है या फिर विभागीय कर्मचारियों की मिली भगत का शिकार हो गये यह बात सोंचनीय है फिलहाल खंड विकास अधिकारी ने घटना की सूचना अपर जिला अधिकारी वित्त एवं राजस्व को दे भोगनीपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है 

जनपद कानपुर देहात के मलासा विकास खंड कार्यालय में मनरेगा के अंतर्गत कार्य करने हेतु कंप्यूटर लगाए थे ,खंड विकास अधिकारी कार्यालय के ठीक बगल में कंप्यूटर कक्ष था जिनमे कई कंप्यूटर ,फोटो कापी मशीन ,इनवर्टर ,प्रिंट मशीन व् कई अन्य उपकरण लगे हुए थे ! आज एक कर्मचारी ने बी.डी.ओ.को सूचना दी कि कक्ष से एक कंप्यूटर गायब है ,जिस पर छानबीन के दौरान एक प्रमुख बात उभरकर सामने आयी कि कक्ष में बिना कहीं सेंध लगे बिना ताला टूटे बंद कमरे से कंप्यूटर गायब हो गये ,फिलहाल कंप्यूटर चोरी की जानकारी मलासा विकास खंड अधिकारी मोतीलाल ने ए.डी.यम. वित्त एवं राजस्व को दी ,बाद में उच्चाधिकारियों के आदेश पर कंप्यूटर चोरी का मुकदमा भोगनीपुर थाने में दर्ज करा दिया गया है !

त्रिपुरेश नारायण अवस्थी 
कानपुर देहात 


आत्महत्या रोकथाम पर त्रिपुरेश की रिपोर्ट

Monday, 10 September 2012 0 comments


त्रिपुरेश नारायण अवस्थी 



आत्महत्या रोकथाम दिवस

10 सितंबर, 2003, पहली बार विश्व आत्महत्या हस्तक्षेप दिवस डब्ल्यूएचओ और अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या हस्तक्षेप एसोसिएशन द्वारा नामित दिन है.पहली बार विश्व आत्महत्या हस्तक्षेप दिवस के अवसर पर, एक परामर्श गतिविधि इस गंभीर सामाजिक समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से 8 सितंबर को बीजिंग Xidan स्क्वायर में बीजिंग मनोवैज्ञानिक संकट अनुसंधान और हस्तक्षेप केंद्र द्वा
रा आयोजित की गई थी. मनोरोग विज्ञान के क्षेत्र, मानसिक स्वास्थ्य, महिलाओं के मुद्दों और कई सौ बीजिंग नागरिकों के लिए परामर्श सेवाएं मौके पर उपलब्ध कराई तथा किशोर मुद्दों में प्रसिद्ध विशेषज्ञों के दर्जनों लोग उपस्थित रहे .

आत्महत्या से युवाओं को बचाने के लिए, सामाजिक कार्य समाज की जरूरत है. आत्महत्या केवल व्यक्तिगत व्यवहार, या सिर्फ किसी और के लिए होता है के रूप में नहीं माना जा सकता है. स्कूलों और परिवारों दोनों में  अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए किशोरों को उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए और कठिन काम करने के लिए स्वयं की ताकत का ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए  महिलायें पुरुषों की तुलना में सामान्य चेहरे के रूप में ज्यादा भावुक होती हैं .महिलाओं को घर में अच्छी माँ और पत्नी होने की उम्मीद में ही दबाव का सामना करना पड़ता है. पारिवारिक हिंसा भी कारण के लिए योगदान देती है. इसके अलावा, महिलाओं के लिए बच्चों से दबाव का सामना करना पड़ता है. एक बार बच्चों के अध्ययन में कमीं या जीवन में समस्याओं का सामना करना, मां यह दोष महसूस करने और खुद को दोषी मानती है ! सबसे पहले, महिलाओं को सामाजिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा और समाज से समय पर मदद की तलाश के लिए सीखना चाहिए. उदाहरण के लिए, जब वे निराश महसूस करतीं हैं, तो उन्हें समर्थन के लिए अपने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों का समर्थन प्राप्त करना चाहिए. दूसरा, उन्हें उनके हितों और शौकों को बढ़ाना चाहिए. सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने  व अपने पति और बच्चों से उनके ध्यान केंद्रित बदलाव कर सकतीं हैं 


                                                              आत्महत्या के कारण 
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या के लिए कारण  के बारे में 43% के लिए नहीं जाना जाता है जबकि बीमारी और पारिवारिक समस्याएं आत्महत्याओं के बारे में 44%  योगदान देती हैं .

किशोरों ,युवा ,बुजुर्ग लोगों को आत्महत्या करने और आत्महत्या के लिए कारणों की संख्या दुनिया भर में दिन ब दिन  बढ़ रही हैं. ऋण, बीमारियों, टूटे रिश्ते, परीक्षा में असफलता, मादक द्रव्यों के सेवन आदि,  आधुनिक जीवन शैली की भीड़ लोगों को और काम करने के लिए उन्हें चारों ओर हताश जीवन की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाती है .

तलाक, दहेज, प्रेम संबंधों , या  शादी करने के लिए अक्षमता, नाजायज गर्भावस्था, अतिरिक्त वैवाहिक मामलों और इस तरह के संघर्ष शादी के मुद्दे से संबंधित है, विशेष रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं ,  भारत में महिलाओं की आत्महत्या एक प्रमुख समस्या है . घरेलू हिंसा पर एक जनसंख्या आधारित अध्ययन में यह पाया गया है कि 64% महिलाओं की घरेलू हिंसा और आत्महत्या के विचार के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध था.  आत्महत्या के मामले घरेलू हिंसा के अलावा. गरीबी, बेरोजगारी, ऋण, और शैक्षिक समस्याओं के रूप में भी देखी जा सकती हैं, भारत में किसानों की आत्महत्या की हाल की बाढ़ एक प्रमुख समस्या के रूप में बनकर उभरी है 
                                                       
                                                      आत्महत्या रोकने के उपाय
विश्व आत्महत्या निवारण दिवस पर गैर सरकारी संगठनों और / आत्महत्या संकट सहायता केंद्रों को विभिन्न प्लेटफार्मों का उपयोग करने के लिए "जीवन है अनमोल  नहीं गंवाना इसे फिजूल" जैसे   आत्महत्या विरोधी संदेश प्रसारित करने के लिए . Walkathons, skits, कठपुतली शो, टीवी शो और परामर्श सत्र के लिए एक जीवन समाप्त होने के भयंकर रूप से कदम न लेने के लिए समझाना चाहिए. दुनिया भर में सभी ब्लॉगर लोगों के जीवन को गले लगाने के लिए और दूर रहना आत्महत्या के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नेट पर एकजुट होना चाहिए !

आत्महत्या को रोका नहीं जा सकता ,पर इसे आमतौर पर स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच चर्चा गोष्ठी का विषय बनाया जा सकता है. आत्महत्या एक व्यक्तिगत मामला है कि इसे व्यक्ति के लिए तय करने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए है ,इसे रोका नहीं जा सकता. हालांकि आत्महत्या अक्सर एक अस्थायी समस्या का स्थायी समाधान है. फिर भी इस पर कुछ नियंत्रण पाया जा सकता है 

 भारत में आत्महत्या की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय योजना विकसित करने की आवश्यकता है. प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की उपलब्धता और कीटनाशक के उपयोग को कम करना चाहिए . शराब की उपलब्धता और खपत को कम करने, आत्महत्या और संबंधित मुद्दों की  जिम्मेदार रिपोर्टिंग मीडिया को बढ़ावा देने और गैर - सरकारी संगठनों को समर्थन, प्राथमिक देखभाल कार्यकर्ता और विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य , शिक्षकों, पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित करना चाहिए !आत्महत्या हस्तक्षेप के प्रभावी साधन के शीघ्र निदान और मानसिक बीमारी का समय पर उपचार है. 

 विश्व आत्महत्या निवारण दिवस औपचारिक रूप से 10 सितंबर, 2003 को घोषणा की थी. "आत्महत्या निवारण के उस पार जीवन काल"  का तथ्य यह है कि सभी उम्र की आत्महत्या की रोकथाम और हस्तक्षेप रणनीतियों पर आत्महत्या के लिए विभिन्न आयु समूहों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है , 

                                                 समाचार - फैक्ट्री मालिक ने की आत्महत्या 
स्लग - फैक्ट्री मालिक ने की आत्महत्या 
एंकर - सूबे के जनपद  कानपुर देहात में पुखरायां  बाईपास स्थित एक फैक्ट्री के मालिक ने मानसिक तनाव के चलते अपनी ही फैक्ट्री में बने आफिस के पंखे में रस्सी लगाकर 3 सितम्बर को आत्महत्या कर ली ,जिसकी सूचना उसके नौकर ने मृतक के बड़े पुत्र को दी, मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को पंखे से उतरवा कर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है !

वी.ओ.-१- जनपद में अवसाद के चलते बढ रही आत्महत्याओं की घटनाओं के चलते 60 वर्षीय वेदप्रकाश सचान निवासी जवाहर नगर पुखरायां ,जिनकी पुखरायां बाईपास में बिजली की मोटर भरने का कारखाना है जिसमे वह बिजली की मोटरों को भरवाने का काम करवाया करता था ,रविवार 3 सितम्बर को की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे उसने अपनी आफिस में लगे पंखे में रस्सी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली ,जब दुकान का नौकर फैक्ट्री में पहुंचा तो उसने फैक्ट्री के आफिस में शव को लटकता देखा जिसकी सूचना उसने वेदप्रकाश के बड़े लड़के ऋषी कुमार को दी ,ऋषी की सूचना पर भोगनीपुर कोतवाल फ़ोर्स के साथ  मौके पर पहुंचे झाहान पुलिस ने शव को पंखे से नीचे उतरवाया ,ऋषी ने बताया कि उसके पिताजी फैक्ट्री में ही रहते थे तथा घर में सिर्फ खाना खाने के लिए ही जाते थे वह कुछ दिन से बीमार थे जिसके कारण वह तनावग्रस्त रहते थे उसी के चलते उन्होंने आत्महत्या की है ,वहीं पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है !


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त्रिपुरेश नारायण अवस्थी 
कानपुर देहात 

रफ़्तार 24 न्यूज़