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200 की चोरी 10,000 में जमानत...11 महीने जेल...

Sunday, 28 April 2013 0 comments

नई दिल्ली। 200 रूपये की चोरी हुई, हमारी बहादुर पुलिस ने आरोपी को गिरफतार कर जेल में डाल दिया। तारीख पर तारीख पड़ती रही। जमानत की अर्जी देने पर 10,000 जमानत राशि रखी गई। गरीब लड़का नहीं जमा कर पाया 10,000 रूपये। 10 मिनट से ज्यादा सुनवाई भी न हुई। 11 महीने तक जेल में सड़ता रहा 19 साल का बेकसूर नौजवान।
रूह कांपने वाली घटना राजधानी दिल्ली में घटित हुई। एक व्यक्ति का बटुआ सब्जी बाजार में चोरी हुआ। उसमें 200 रूपये थे। उसने पुलिस को 100 नम्बर पर सूचित किया। बहादुर पुलिस उसी रात पहुंची सब्जी मंडी। एक 19 साल के मुद्दकस को सिर्फ इसीलिए गिरफतार किया गया, क्योंकि उसके पास बटुआ था। जिसमें 200 रूपये थे।
शिकायतकर्ता ने साफ बता दिया कि यह बटुआ उसका नहीं है। पर हमारी बहादुर पुलिस को इतनी फुरसत कहां कि किसी बेकसूर को छोड़ने की जहमत उठाऐ। उसे कोर्ट में पेश किया गया। जज साहब ने लड़के को बोलने तक से मना कर दिया। आगे के केसों की सुनवाई के लिए बोलकर उसे जेल भिजवा दिया गया। 3 महीने तक एक बेकसूर जेल में बेवजह सड़ता रहा। इस बीच उसके पिता का देहांत हो गया। जिसकी सूचना तक उस मासूम को नहीं मिली।
ह्यूमन राईट्स की एक कार्यकर्ता से उसकी मुलाकात हुई। लगा अब जल्द जेल से बाहर जाएगा वह। उस कार्यकर्ता ने मुद्दकस की जमानत अर्जी दाखिल की। जज साहब ने जमानत राशि 10,000 रूपये जमा कराने का आदेश दिया। यह सुनते ही मुद्दकस के पैरो के नीचे से जमीन निकल गयी। एक गरीब लड़का जिसने अपनी जिंदगी में 10,000 रूपये एक साथ शायद ही कभी देखें हों। वह कहां से लाऐं 10,000 रूपये।
फिर शुरू हुआ तारीखों का सिलसिला और बीत गए पूरे 11 महीने, इस बीच जज साहब को यह केस सुनना बहुत छोटा लगा और हर बार बस 5-6 मिनट में सुनवाई पूरी कर दी जाती। हर बार मुद्दकस से गुनाह कुबूल करने को कहा गया। एक बार भी उसे बेगुनाह मानकर उसकी बात नहीं सुनी गयी।
पूरा मामला शीशे की तरह बिल्कुल साफ था। शिकायतकर्ता ने साफ बोल दिया था कि यह बटुआ उसका नहीं है। फिर भी उसे जेल में सड़ाया गया।
जज साहब द्वारा किए गए व्यवहार को दोगलापन ही कहा जा सकता है। एक ओर उन्हें केस इतना छोटा लगा कि इसे सुनने का उनके पास वक्त ही नहीं। दूसरी ओर समाज के लिए आरोप को बेहद घातक बताते हुए जेल में डाल दिया। 200 रूपये की चोरी के लिए 10,000 रूपये जमानत राशि क्यो?
पूरे 11 महीने बीतने के बाद मजबूर होकर मुद्दकस ने वह गुनाह कुबूल कर लिया, जो उसने कभी किया ही नहीं। इसके बाद जज साहब का हुकूम कुछ यूं था ..मुद्दकस अंसारी ने अपना गुनाह कुबूल किया इसीलिए उसे 3 महीने की सजा सुनाई जाती है। लेकिन उसने पहले ही 11 महीने जेल में बिता दिए हैं। इसलिए उसे छोड़ दिया जाए।
इन सब में दोष किसका है? कानून व्यवस्था? जज साहब का रवैया? पुलिस प्रशासन? सवाल तो कई हैं, पर जवाब कोई नहीं। अगर 11 महीने पहले ही मुद्दकस की बात एक बार इतमिनान से सुन ली जाती, तो शायद दवा के अभाव में मरा उसका बाप जिंदा होता। जवानी के 11 महीने उसे जेल में नहीं गुजारने पड़ते। उसका परिवार भुखमरी की कगार पर नहीं पहुंचता।

निर्भया के साथ हुई दरिंदगी से कम नहीं है यह हैवानियत

Friday, 19 April 2013 0 comments

नई दिल्ली ।पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर में रेप के साथ-साथ पाशविक बर्बरता का शिकार हुई 5 साल की बच्ची का मामला देख कर एक बार फिर निर्भया का मामला सबकी आंखों के सामने आ गया। बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर बता रहे हैं कि उन्होंने ऐसी क्रूरता की घटना नहीं देखी थी।

गौरतलब है कि पांच महीने पहले 16 दिसंबर को दिल्ली में निर्भया के साथ गैंग रेप की भयावह घटना ने पूरे देश को उद्वेलित कर दिया था। उस घटना में रेप के साथ ही आरोपियों ने जिस तरह की निर्दयता दिखाई थी, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। उस घटना को 6 महीने भी नहीं हुए हैं और इसी दिल्ली में 5 साल की बच्ची के साथ हुई इस खौफनाक घटना ने एक बार फिर सबको सकते में डाल दिया है।

5 साल की यह मासूम लड़की 14 अप्रैल से गायब थी। उसे उसी बिल्डिंग में ग्राउंड प्लोर में रहने वाले एक युवक ने अपने कमरे में हाथ-पैर बांध कर कैद कर रखा था। उसने बार-बार बच्ची के साथ रेप किया। लगातार पीड़ा से बच्ची बेहोश हो गई थी।
डॉक्टरों के मुताबिक लड़की इस कदर तकलीफ और खौफ से गुजरी है कि वह ठीक से कुछ बता भी नहीं पा रही। उसके पेट के निचले हिस्से से प्लास्टिक की शीशी और मोमबत्ती निकली है। इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी क्रूरता का केस उनके सामने कभी नहीं आया।

उसकी हालत अब भी गंभीर है। डॉक्टर अगले 48 घंटों को उसकी जिन्दगी के लिए बेहद अहम बता रहे हैं।

पुलिस का रवैया भी वैसा ही अमानवीय
निर्भया वाले मामले में पुलिस के रवैये को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। इस मामले में भी पुलिस का रवैया वैसा ही लापरवाही भरा और कई मामलों में तो उस घटना से बदतर रहा। न केवल पुलिस चार दिनों तक बच्ची को खोजने का कोई कारगर प्रयास नहीं कर सकी, बल्कि बाद में जब बच्ची मिल गई और उसके साथ हुई अमानवीय हरकत की सामने आ गई तब भी पुलिस ने कथित तौर पर बच्ची के पिता को 2000 रुपए की रिश्वत देते हुए उनसे कहा कि इस घटना का जिक्र मीडिया से न करें।

घटना को दबाने की इस आपराधिक कोशिश का आरोप भी जैसे कम न था। जब इस घटना के विरोध में आसपास के लोग और आम आदमी के कुछ कार्यकर्ता जुटे और विरोध करने हॉस्पिटल पहुंचे तो वहीं एसीपी स्तर के एक ऑफिसर ने एक युवती को थप्पड़ मार दिया।

हालांकि उस ऑफिसर को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन इस घटना से इतना तो साफ है कि दिल्ली पुलिस ने निर्भया वाले मामले से भी कोई सबक नहीं सीखा है। न चुस्ती-फुर्ती के मामले में और न महिलाओं का सम्मान करने के मामले में। source:NBT

रेप के खिलाफ प्रोटेस्ट,एसीपी ने मारा चांटा

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने बेशर्मी का एक और नमूना सामने आया है। यहां अस्पताल के बाहर प्रोटेस्ट कर रही युवती को एसीपी अहलावत ने चांटा मार दिया। मौके पर मीडिया की मौजूदगी के कारण एसीपी का यह कारनामा पूरे देश ने देखा, जिसके बाद दोष्ाी एसीपी को सस्पेंड कर दिया गया। एसीपी के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। 

एसीपी के चांटे की शिकार हुई युवती ने बताया कि जिंदगी और मौत के बीच झूल रही बच्ची के परिजनों से मिलने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ए के वालिया अस्पताल पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने उसे रास्ते से हटने के लिए कहा, जब वह नहीं हटी तो एसीपी ने उसे चांटा मार दिया और गालियां दीं। 

दिल्ली में दुष्कर्म के बाद एक नन्ही बच्ची जहां जिंदगी की जंग लड़ रही है, वहीं पुलिस है कि बच्ची के पिता को मुंह बंद करने की कीमत ऑफर करने में व्यस्त है। पांच साल की यह बच्ची आईसीयू में भर्ती है। उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। उसके परिवार का कहना है कि बच्ची का गला रेता गया तथा उसके जननांगों को चोट पहुंचाई गई।

बच्ची के पिता के मुताबिक पुलिस ने उसे मुंह बंद रखने के लिए 2000 रूपए की पेशकश की और यह भी कहा कि वे ईश्वर का धन्यवाद अदा करे कि बच्ची जिंदा बच गई। इसी बीच खबर यह भी है कि पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। बताया जाता है कि यह व्यक्ति मुख्य अभियुक्त का पिता है। 



बच्ची के एक परिजन के अनुसार - जब उन्होंने पुलिस से पूछा इस मामले में वे क्या कर रहे हैं तो उन्होंने बताया कि हमें खुश होना चाहिए कि बच्ची मिल गई है तथा हम उसके जल्द स्वस्थ होने की कामना करें।


इस बच्ची को दो दिन पहले पूर्वी दिल्ली में गांधी नगर स्थित उसके घर से उठा लिया गया था। उसके परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उसकी तलाश शुरू करने में काफी वक्त लगा दिया। 



बच्ची की मां ने न्याय की मांग की है। दो दिन पहले वह खेलने गई थी जहां से उसका अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता ने उसे कमरे में बंद कर दिया और वहीं उसके साथ दुष्कर्म किया। 





वहीं सुबह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के कुछ लोगों का भी अस्पताल के बाहर सुबह पुलिस से झगड़ा हुआ था। इसी बीच बच्ची की हालत को देखते हुए उसे एलएनजेपी अस्पताल में भी शिफ्ट किए जाने पर चर्चा चल रही है। source:patrika

सड़क पर पत्थर से लिखा 'रेप हुआ है'

Thursday, 18 April 2013 0 comments


नई दिल्ली।। आज सुबह साउथ दिल्ली के नानकपुरा गुरुद्वारे के पास फुटओवर ब्रिज के नीचे एक नेपाली युवती बदहवास हालत में पड़ी मिली। जिस्म पर अस्त-व्यस्त और थोड़े कपड़े। कई जगह चोट के निशान। करीब 20 साल की इस युवती को यूं पड़ा देख वहां राहगीरों का मजमा इकठ्ठा हो गया। लोगों ने पूछा तो युवती ने एक ईंट का टुकड़ा उठा कर सड़क पर लिखकर बताया कि उसके साथ 3 लोगों ने रेप किया है।

किसी ने पुलिस को कॉल करके इस सनसनीखेज मामले की सूचना दी। फौरन साउथ दिल्ली के कई सीनियर अफसर समेत लोकल पुलिस पहुंची। युवती ने बताया कि किडनैप करके उसके साथ गैंगरेप किया गया है। तुरंत युवती को अस्पताल ले जाया गया।

खबर लिखे जाने तक युवती पूरी तरह होशो-हवास में नहीं थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस के कई आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी थी। एक सीनियर पुलिस अफसर ने बताया कि आज सुबह तकरीबन साढ़े सात बजे पुलिस को कॉल मिली। नेपाली लड़की यहां कोटला मुबारकपुर इलाके में किराए पर रहती है। युवती का आरोप है कि उसे किडनैप करके रात में 3 लड़कों ने गैंगरेप किया है।

लड़की की हालत देखकर आशंका है कि वारदात से पहले उसे बहुत ज्यादा नशीला पदार्थ दिया गया। वह पूरी तरह सुध में नहीं है। वहीं, जिस सुनसान जगह पर लड़की अस्त-व्यस्त हालत में पड़ी थी, वहां से गुजर रहे राहगीरों ने देखा तो पब्लिक इकठ्ठी हो गई। कुछ चश्मदीदों के मुताबिक जब लोगों ने उसे हिला- डुलाकर पूछा तो कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी। नेपाली लड़की ने एक ईंट का टुकड़ा उठाकर सड़क पर लिखकर बताया कि उसके साथ रेप हुआ है।

पुलिस अफसर के मुताबिक लोकल थाना पुलिस ने कुछ लड़कों को संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। लड़की को मेडिकल के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लड़की के होश में आने और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले का पता चल सकेगा। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है।

source:NBT

एयरटेल-वोडाफोन के विरूद्ध चार्जशीट

Friday, 21 December 2012 0 comments


 

नई दिल्ली। सीबीआई ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कार्यकाल के दौरान स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं के संबंध में दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों भारती एयरटेल और वोडाफोन तथा एक पूर्व दूरसंचार सचिव के विरूद्ध शुक्रवार को आरोप पत्र दाखिल किया। 

सीबीआई की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने के बाद जांच एजेंसी के वकील एके सिंह ने बताया कि कंपनियों के किसी अधिकारी का नाम आरोप पत्र में नहीं है लेकिन दूरसंचार विभाग के एक पूर्व सचिव का नाम है। यह मामला वर्ष 2002 में अतिरिक्त टूजी स्पेक्ट्रम के आवंटन से संबंधित है और उस समय श्यामल घोष दूरसंचार सचिव थे। 

सीबीआई का आरोप है कि अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन का निर्णय इन कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया था। आरोपियाें पर आपराधिक षडयंत्र रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई के अनुसार इस आवंटन से सरकार को 846 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में टूजी स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटन में अनियमितताओं के कारण उच्चतम न्यायालय ने इस वर्ष फरवरी में 122 लाइसेंस रद्द कर दिए थे और इस मामले में पूर्व संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए. राजा तथा दूरसंचार विभाग के कुछ पूर्व अधिकारियों के विरूद्ध मुकदमा चल रहा है। उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को वर्ष 2001 से 2007 के दौरान टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच भी करने को कहा था।
patrika

कैदियों में भी गुस्‍सा: गैंगरेप के आरोपी को पिलाया पेशाब

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नई दिल्‍ली। दिल्‍ली गैंगरेप के आरोपियों से तिहाड़ जेल में बंद कैदी भी नफरत कर रहे हैं। यहां मुकेश की न सिर्फ पिटाई हुई बल्कि उसे मलमूत्र भी जबरन खिलाया गया। कैदियों ने जमकर उसकी पिटाई भी की। इसके बाद जेल प्रशासन ने उसे दूसरे बैरक में भेज दिया।
 
मुकेश की की पहचान आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) के दौरान पीडि़ता के दोस्त ने की थी।  परेड के दौरान पीडि़ता के दोस्त के सामने 11 लोगों को खड़ा किया गया था। इन सभी लोगों को देखने के बाद उसने मुकेश को पहचान लिया। टीआईपी के दौरान एक मजिस्ट्रेट, दक्षिण दिल्ली जिला पुलिस और तिहाड़ जेल के अधिकारी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि वारदात के वक्त पीडि़ता का यह दोस्त बस में ही मौजूद था। आरोपियों ने इसकी भी बेरहमी से पिटाई करने के बाद दोनों को महिपालपुर फ्लाईओवर के पास फेंक दिया था। बुधवार को साकेत कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी पवन गुप्ता और विनय शर्मा ने शिनाख्त परेड से इंकार कर दिया था, जबकि राम सिंह नामक चौथे आरोपी ने मंगलवार को अदालत के समक्ष शिनाख्त परेड से इंकार किया था।
 
माता-पिता भी आजिज आ चुके थे मुकेश और राम सिंह के चाल-चलन से 
 
मामले की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी के अनुसार मुकेश और राम सिंह का चाल-चलन लंबे समय से आपत्तिजनक रहा है। दोनों अक्सर शराब के नशे में अपनी मां की पिटाई करने से भी बाज नहीं आते थे। दोनों बेटों के इस बर्ताव से दुखी होकर इनके माता-पिता दिल्ली छोड़कर वापस राजस्थान चले गए थे। पुलिस अधिकारी के अनुसार हैवानियत भरे इस कृष्य को अंजाम देने वाले राम सिंह के चेहरे पर गिरफ्तार किए जाने के बाद से लेकर तिहाड़ जेल भेजे जाने तक किसी तरह का पछतावा नहीं दिखा। 
source: Bhaskar

पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाने के फैसले पर अडिग है : ममता बनर्जी

Tuesday, 20 November 2012 0 comments

ममता बनर्जी 

  रानी कश्यप, नई दिल्‍ली। रफ़्तार 24 न्यूज़ 
तृणमूल कांग्रेस रिटेल में एफडीआई के फैसले को लेकर यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के कदम पर कायम है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाने के फैसले पर अडिग है। उन्‍होंने यह भी कहा कि अगर वामपंथी ऐसा प्रस्ताव लाते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। 

ममता ने यह भी कहा कि अविश्‍वास प्रस्‍ताव को लेकर विपक्षी दल भ्रम फैला रहे हैं, ऐसे में विरोधी भ्रम न फैलाएं। ममता ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा अगल है, इसलिए हम उनसे अलग हो गए। मेरे लिए कोई भी पार्टी अछूत नहीं है। 

तृणमूल नेता ने कहा कि हम वामदलों से भी बात करने के लिए तैयार हैं। ममता ने फोन पर गुरुदास दासगुप्‍ता से भी बात की है। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि वामदल कांग्रेस का समर्थन कर रही है। उधर, सीपीआई ने कहा कि ममता से अभी तक कोई बातचीत नही हुई है। वहीं, माकपा ने कहा है कि तृणमूल के अविश्‍वास प्रस्‍ताव का वे समर्थन नहीं करेंगे। 

गौर हो कि कांग्रेस ने बीते दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर संप्रग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद के इतिहास में 19 सदस्यों वाली किसी भी पार्टी ने इस तरह का कदम कभी नहीं उठाया है। पार्टी ने बनर्जी से अपने फैसले पर गंभीरता से पुनर्विचार करने को कहा।

यूपीए सरकार पर मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआई की अनुमति देने और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला करते हुए ममता ने गत 17 नवंबर को कहा था कि उनकी पार्टी संसद के शीतकालीन सत्र में संप्रग के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। नई दिल्‍ली : तृणमूल कांग्रेस रिटेल में एफडीआई के फैसले को लेकर यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के कदम पर कायम है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाने के फैसले पर अडिग है। उन्‍होंने यह भी कहा कि अगर वामपंथी ऐसा प्रस्ताव लाते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। 

ममता ने यह भी कहा कि अविश्‍वास प्रस्‍ताव को लेकर विपक्षी दल भ्रम फैला रहे हैं, ऐसे में विरोधी भ्रम न फैलाएं। ममता ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा अगल है, इसलिए हम उनसे अलग हो गए। मेरे लिए कोई भी पार्टी अछूत नहीं है। 

तृणमूल नेता ने कहा कि हम वामदलों से भी बात करने के लिए तैयार हैं। ममता ने फोन पर गुरुदास दासगुप्‍ता से भी बात की है। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि वामदल कांग्रेस का समर्थन कर रही है। उधर, सीपीआई ने कहा कि ममता से अभी तक कोई बातचीत नही हुई है। वहीं, माकपा ने कहा है कि तृणमूल के अविश्‍वास प्रस्‍ताव का वे समर्थन नहीं करेंगे। 

गौर हो कि कांग्रेस ने बीते दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर संप्रग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद के इतिहास में 19 सदस्यों वाली किसी भी पार्टी ने इस तरह का कदम कभी नहीं उठाया है। पार्टी ने बनर्जी से अपने फैसले पर गंभीरता से पुनर्विचार करने को कहा।

यूपीए सरकार पर मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआई की अनुमति देने और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला करते हुए ममता ने गत 17 नवंबर को कहा था कि उनकी पार्टी संसद के शीतकालीन सत्र में संप्रग के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। 

बाल ठाकरे ने मुसलमानों को कहा था कैंसर, क्‍या इससे भी ज्‍यादा 'भड़काऊ' था शाहीन का कमेंट?

Monday, 19 November 2012 0 comments


नई दिल्ली। बाल ठाकरे की मौत के बाद 21 साल की एक लड़की ने फेसबुक पर कमेंट किया। इस कमेंट को ' लोगों की धार्मिक भावना भड़काने वाला' माना गया  और लड़की को अरेस्‍ट कर लिया गया। यही नहीं, उसके कमेंट को लाइक करने वाली एक लड़की को भी पुलिस ने धर लिया। दोनों को आईपीसी की धारा 295 (ए) (धार्मिक भावनाएं भड़काना) और आईटी एक्‍ट, 2000 की धारा 64 (ए) के तहत पकड़ा गया था। 
 
बाल ठाकरे खुद ताउम्र विवादित और भड़काऊ बयान देने के चलते विवादित रहे। 80 के दशक में उन्‍होंने कहा था, 'मुसलमान कैंसर की तरह फैल रहे हैं और उनका इलाज भी कैंसर की तरह ही होना चाहिए'। ऐसे में एक फेसबुक कमेंट करने और उसे लाइक करने को लेकर की गई गिरफ्तारी का हर ओर विरोध हो रहा है। अब प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने इसे गलत ठहराते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
 
 
21 वर्षीय शाहीन धांदा ने ठाकरे के निधन से महाराष्ट्र बंद पर फेसबुक पर कमेंट किया था। उसने लिखा था कि ठाकरे जैसे बहुत से लोग इस देश में पैदा होते हैं। उनका देहांत होता है। ऐसे लोगों के लिए बंद रखना कहां तक उचित है? टिप्पणी को उसकी सहेली रेणु ने लाइक किया था। इस टिप्पणी को एक अंग्रेजी दैनिक ने खबर बनाकर बनाकर प्रकाशित किया। इसके बाद शाहीन के पालघर स्थित रिश्तेदार के आर्थोपेडिक क्लीनिक पर 40 के करीब शिवसैनिकों ने हमला करके तोडफ़ोड़ की। इसके बाद एक स्थानीय शिवसैनिक की शिकायत पर मामला दर्ज कर शाहीन और रेणु को रविवार की रात गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने लड़कियों को पहले न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। लेकिन कुछ घंटे बाद ही 15-15 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। मंगलवार को पुलिस ने क्लिनिक पर तोड़फोड़ के आरोप में नौ लोगों को हिरासत में लिया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि ये शिवसैनिक हैं या नहीं। गृह मंत्रालय ने भी मामले की रिपोर्ट मांगी है।
 
आप बताएं कि क्‍या दोनों लड़कियों ने फेसबुक पर कमेंट कर और उसे लाइक कर वाकई गुनाह किया था? क्‍या पुलिस ने लड़कियों को पकड़ कर अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता (संविधान के अनुच्‍छेद 19 के तहत) के उनके मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया है? क्‍या यह कमेंट किसी की 'धार्मिक भावना भड़काने वाला' था? अगर ऐसे कमेंट पर लोगों की गिरफ्तारी होने लगेगी तो हम-आप में से कितने लोग जेल से बाहर रह सकेंगे? क्‍या आपके मन में ये सवाल नहीं उठते हैं? और, इनके जवाब भी तो आपके पास होंगे? तो यहां अपने सवाल और जवाब लिख कर पूरी दुनिया को बताइए और खुल कर बोलिए कि इस मामले में दोषी कौन है और उसे सजा कौन देगा?


एक लड़की  के पालघर स्थित रिश्तेदार के आर्थोपेडिक क्लीनिक पर हमला करने वाले 9 शिवसैनिकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इन शिवसैनिकों पर आरोप है कि उन्‍होंने क्‍लीनिक पर   हमला करके तोडफ़ोड़ की थी।
 
शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की अंत्येष्टि के दिन मुंबई की स्थिति को लेकर फेसबुक के माध्यम से सवाल करने वाली लड़कियों की गिरफ्तारी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से जानकारी तलब की है। गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से यह जानना चाहा है कि आखिर वे कौन सी वजहें थीं, जिससे दो लड़कियों को गिरफ्तार करने की जरूरत पड़ी। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य पुलिस से यह सवाल भी किया है कि क्या ऐसे मामलों में गिरफ्तारी से बचा नहीं जा सकता था। गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही सोशल मीडिया पर पहरा बिठाने के आरोप झेलती रही है।
 
केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल सोशल मीडिया पर गैरजरूरी और सांप्रदायिकता फैलाने वाले विचारों पर रोक के लिए फेसबुक, ऑरकुट, यूट्यूब, ट्विटर के प्रतिनिधियों से कई दौर की बैठकें भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं, सरकारी बाबू इन सोशल साइट्स का कैसे प्रयोग करें, इसको लेकर सरकार मानक तक बना रही है। 
 
हाल ही में दूरसंचार मंत्री ने कहा था कि सरकार का इरादा सरकारी स्तर पर सोशल साइट्स पर नियंत्रण करना नहीं है, लेकिन सरकार चाहती है कि सोशल साइट्स चलाने वाली कंपनियां, अभिव्यक्ति के पैरोकार स्वयं कोई ऐसी सीमा निर्धारित करें, जिससे सोशल साइट्स के माध्यम से कोई देश के सांप्रदायिक सौहाद्र्र और सार्वभौमिकता के लिए खतरा न उत्पन्न कर पाए। 
साइबर मामलों के जानकार पीयूष पांडे लिखते हैं कि क्या सोशल मीडिया के तमाम मंचों को अब हमें अलविदा कह पुरातन काल में लौट जाना चाहिए? या सोशल मीडिया के जरिए अभिव्यक्ति की आजादी के सवाल को अब बतौर आंदोलन खड़ा किए जाने का वक्त आ गया है? मुंबई में बाला साहेब ठाकरे के निधन के बाद मुंबई बंद की फेसबुक पर आलोचनात्मक टिप्पणी की वजह से गिरफ्तार दो लड़कियों का मसला अब ऐसे ही गंभीर सवाल उठा रहा है। 
 
बाल ठाकरे के निधन के बाद मुंबई बंद को लाखों लोगों ने अपने-अपने नजरिए से देखा। किसी ने इसे उनका सम्मान बताया तो किसी ने शिवसैनिकों का भय। सोशल मीडिया पर बाला साहेब के अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान से किए जाने पर सवाल भी हैं तो उनकी कद्दावर शख्सियत पर कसीदे भी। इन टिप्पणियों के बीच मुंबई की एक 21 वर्षीय लड़की ने लिख डाला, 'ठाकरे जैसे लोग रोज पैदा होते हैं और मरते हैं और इसके लिए बंद नहीं होना चाहिए।' पुलिस ने लाखों टिप्पणियों के बीच इस लड़की की टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली मानते हुए आईपीसी की धारा 505 और आईटी एक्ट की धारा 66 ए के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया। हद तो यह कि लड़की की पोस्ट को लाइक करने वाली दूसरी लड़की को भी इन्हीं धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया। 
 
इस मामले में पुलिस की अति सक्रियता सवाल खड़े करती है। एक सवाल लाखों टिप्पणियों के बीच एक टिप्पणी करने वाली लड़की को निशाना बनाने का भी है। व्यवहार में कई मौकों पर फेसबुक पर 'लाइक' का मतलब पसंद करना नहीं बल्कि पोस्ट देखने की पुष्टि करना भी होता है। दरअसल, सवाल सिर्फ इस एक मामले का भी नहीं है। हाल में कई मौकों पर सोशल मीडिया पर लिखे-कहे के लिए पुलिस ने डंडा चलाया है। ममता बनर्जी के कार्टून ई-मेल करने के आरोप में बीते अप्रैल में पश्चिम बंगाल में एक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया गया। सितंबर में कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को मुंबई में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 
 
बीते महीने पुडुचेरी के कारोबारी एस.रवि को वित्त मंत्री पी.चिदंबरम के बेटे कार्ति चितंबरम के खिलाफ अपमानजनक ट्वीट करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। सीआईडी ने ट्विटर खाते के जरिए रवि का पता लगाया और सूचना प्रौद्यौगिकी कानून की धारा 66ए के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। 
 
उस वक्त भी यह सवाल उठा था कि रवि ने अपने ट्वीट में गाली-गलौज का इस्तेमाल नहीं किया था, अलबत्ता उन्होंने आरोप जरूर लगाया। रवि का तर्क है कि उन्होंने सिर्फ वही लिखा, जिसे उन्होंने अखबारों में पढ़ा। दिलचस्प है कि जिस वक्त रवि ने ट्वीट किए थे, उस वक्त ट्विटर पर उनके फॉलोवर्स की संख्या 25 से भी कम थी। निश्चित तौर पर रवि ने ट्वीट में जो लिखा, उसे वह साबित नहीं कर सकते। लेकिन, सूचना प्रौद्यौगिकी कानून में 'अपमानजनक' शब्द की परिभाषा बहुत स्पष्ट नहीं है, लिहाजा आने वाले दिनों में इस तरह के मामले और देखने को मिल सकते हैं। 
 
सूचना तकनीक कानून के जानकारों का मानना है कि धारा 66 ए में संशोधन की जरूरत है। साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल के मुताबिक मुंबई बंद पर आलोचनात्मक टिप्पणी वाले मामले में भी पुलिस के सामने कई चुनौतियां हैं। उनके मुताबिक, 'किसी व्यक्ति ने अपनी वॉल पर कुछ लिखा, इसे किसी ने लाइक किया तो इसका सांप्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे से क्या संबंध। कम से कम इसे साबित करना आसान नहीं है।' मुंबई बंद टिप्पणी पर आखिरी अदालती आदेश कुछ भी हो, लेकिन एक बात साफ है कि भारत में अभिव्यक्ति की आजादी पर सरकारी अंकुश की बात को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता। कानून की आड़ में सरकार के पास अपना चाबुक है, जिसका इस्तेमाल कभी भी किया जा सकता है। 
 
गूगल की ताजा पारदर्शिता रिपोर्ट के मुताबिक भी भारत सरकार ने इस साल ही पहले छह महीनों में 2,319 मामलों में वेब यूजरों की गोपनीय जानकारिया मांगी हैं। भारत की तरफ से आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वेब सेंसरशिप की तरफ बढ़ते सरकारी कदमों के मद्देनजर ही अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने साल 2012 में पहली बार भारत को निगरानी वाले देशों की सूची में रखा है। यह कहते हुए कि भारत में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और सोशल नेटवर्किंग कंपनियों पर कंटेंट सेंसरशिप करने के लिए खासा दबाव है। 
 
निश्चित तौर पर सोशल मीडिया बनाम अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल अब बड़े विमर्श की बात करता है। सूचना प्रौद्योगिकी कानून का दुरुपयोग रोकने और लोगों को इन कानूनों के बारे में जागरुक करने के बाबत नए सिरे से कोशिश शुरू होनी चाहिए। 
 
पीयूष के विचार जानने के बाद आपकी जो राय बनती हो, उसे नीचे कमेंट बॉक्‍स में पोस्‍ट कर उन तक और बाकी पाठकों तक पहुंचा सकते हैं...
Source: Bhaskar

गुटखे पर रोक को तंबाकू उत्पादक बताते हैं पक्षपातपूर्ण, कैंसर भले ही हो!

Sunday, 4 November 2012 0 comments

नई दिल्ली। पूरे संसार में कैंसर के खिलाफ जंग में तम्बाकू के हर तरह से सेवन को नुकसानदायी माना गया है और भारत में गुटखे की वजह से होने वाले मुंह के कैंसर के महामारी स्वरूप को देखते हुए कई राज्यों ने इस पर रोक लगादी है।

इसके विपरीत गुटखा निर्माताओं के हित में काम करने वाली "स्मोकलेस टोबेको ग्रोवर्स एसोसिएशन" (एसटीए) ने गुटखा बिक्री के प्रतिबंध को "पक्षपातपूर्ण" बताते हुये कहा कि अभी भी बाजार में सिगरेट और बीडी की धडल्ले से बिक्री हो रही है। इस वक्त राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, केरल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, मणिपुर, अरूणांचल प्रदेश, दिल्ली और गोवा में गुटखा की बिक्री प्रतिबंधित है। एसटीए ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियामक कानून 2011 के तहत गुटखा की बिक्री प्रतिबंधित नहीं करनी चाहिए क्योंकि गुटखा को सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद कानून-2003 (सीओटीपीए) के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।

एसोसिएशन के सदस्य सीके शर्मा ने बताया कि संघ के सदस्यों ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद से मुलाकात की और बताया कि किस प्रकार से केन्द्र की सलाह पर 14 राज्यों में गुटखा बिक्री को प्रतिबंधित किया गया जिसके चलते तंबाकू उत्पादन से जुडे करीब चार करोड लोग प्रभावित हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधि मंडल में शामिल शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले पर गौर करने और इसके संबंध में उचित सिफारिश देने के लिए एक उप-समिति बनाने का भरोसा दिया है। शर्मा ने कहा कि गुटखा को तंबाकू उत्पाद की क्षेणी में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने इसकी बिक्री प्रतिबंधित कर दी है।

यह पक्षपातपूर्ण है क्योंकि सिगरेट और बीडी में गुटखा से अधिक मात्रा में तंबाकू होती है, लेकिन उसकी बिक्री को प्रतिबंधित नहीं किया गया है, जबकि गुटका की बिक्री बंद कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि गुटखा कोई खाद्य उत्पाद नहीं है और इससे बिक्री प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए। गुटखा निर्माता सीओटीपीए नियामक के तहत कार्य करते हैं और वे अपने उत्पादों में वैधानिक चेतावनी भी छाप रहे थे। याद दिला दें, स्मोकलेस टोबेको ग्रोवर्स एसोसिएशन ने गत दिनों अपने इसी अभ्भियान के तहत देश के अखबारों में विज्ञापन छपवाए थे लेकिन अदालत ने इनके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी।Source-khaskhabar

दूध,पानी,तेल की खुली बिक्री पर बैन

Thursday, 1 November 2012 0 comments


 

नई दिल्ली। पानी,नमक,चाय,मसाले,दाल,अनाज,दूध,घी,खाद्य तेल,सीमेंट और कपडे धोने का पाउडर जैसी रोजमर्रा की वस्तएं अब खुली नहीं मिलेगी। सरकार ने गुरूवार को बताया कि दिन प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली 19 वस्तुओं की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इनकी पैकिंग का आकार निश्चित कर दिया गया है।

सरकार के अनुसार पैकिंग के मानक तय कर दिए गए हैं और इन वस्तुओं की पैकिंग 50 ग्राम, 100 ग्राम और इसके गुणक, एक किलोग्राम और इसके गुणक तथा 10 किलोग्राम और इसके गुणक में ही की जाएगी। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि 31 अक्टूबर 2012 पहले से बाजार में आ चुकी वस्तुओं की गैर मानक पैकिंग इसकी अपवाद रहेगी। सरकार ने कहा है कि इन वस्तुओं की बिक्री और आयात निश्चित पैकिंग में ही करना होगा। सरकार ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्रित शासित प्रदेशों की सरकारों को सूचित कर दिया है और उचित कदम उठाने को कहा है। 

निर्देशों के अनुसार बेबी फूड, घी, मक्खन,खाद्य तेल, चावल, आटा, वनस्पति, बिस्किट और ब्रेंड की खुली बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। इनकी बिक्री 25 ग्राम से लेकर 10 किलोग्राम की पैकिंग में की जा सकती है। इनके अलावा 100 ग्राम तक मोटे अनाज और दाल की खुली बिक्री जा सकती है लेकिन इससे ज्यादा की मात्रा के लिए मानक पैकिंग की जरूरत होगी। इनकी पैकिंग 100 ग्राम से लेकर पांच किलोग्राम और इसके गुणक में जा सकती है। 

चाय और काफी की खुली बिक्री केवल 25 ग्राम तक होगी। इसके बाद इन्हें 50 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम के पैकेट में रखना होगा। पेय पदार्थो में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं और दूध पाउडर 50 ग्राम तक खुले बेचे जा सकते हैं। इसके बाद इन्हें 100 ग्राम और इसके गुणक की पैकिंग में बेचना होगा। नमक,साबुन और पेंट की न्यूनतम पैकिंग 50 ग्राम होगी और इसके बाद इसके गुणक की पैकिंग में उपभोक्ता को मिलेगा। पीने के पानी की पैकिंग 100 ग्राम से लेकर पांच लीटर तक की होगी और इसके बाद यह एक लीटर के गुणक में बेचा जाएगा। सीमेंट की पैकिंग एक किलोग्राम और इसके गुणक में होगी। 
 Source-patrika

बिना सेट टॉप बॉक्स बंद हो जाएगा टीवी

Wednesday, 31 October 2012 0 comments


 

नई दिल्ली। चार मेट्रो दिल्ली,मुंबई,कोलकाता और चेन्नई में केबल ऑपरेटर्स को डिजिटल तकनीक अपनाने की मियाद बुधवार को खत्म हो रही है।


देशभर में सेट टॉप बॉक्स के जरिए डिजिटल सिग्नल तकनीक अपनाने की त्री स्तरीय प्रक्रिया का यह पहला चरण है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी डेटा के अनुसार मुंबई एकमात्र मेट्रो है जहां 10 प्रतिशत डिजिटाइजेशन हो गया है। इसके बाद दिल्ली और फिर कोलकाता हैं। 

चेन्नई में केवल 61 प्रतिशत डिजिटाइजेशन ही हुआ है। सरकार एक नवंबर से एनेलॉग सिग्नल को अवैध बताए जाने के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए हुए है। Source:patrika

रेप नहीं करने दिया तो ईंट से कुचल कर ले ली लड़की की जान, कचरे में फेंक दी लाश

Monday, 29 October 2012 0 comments


नई दिल्ली। अश्लील हरकतों का विरोध करने वाली एक दस वर्षीय बच्ची की बेलन और ईंट से सिर कुचल कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गोपाल नामक हत्यारोपी को तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया है। वह दिल्ली से फरार होने की कोशिश में था। 
 
दक्षिण पूर्वी जिला के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय चौधरी ने बताया कि 26 अक्टूबर की देर रात्रि पुल प्रहलादपुर इलाके में एक दस वर्षीय बच्ची का शव कूड़ेदान से बरामद किया गया। पूछताछ करने पर पुलिस को पता चला कि बच्ची के पड़ोस में रहने वाला गोपाल घटना के बाद से फरार है। इसके बाद पुलिस ने गोपाल को तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। 
 
पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी गोपाल और पीड़िता का परिवार कटिहार (बिहार) के रहने वाला है। एक ही शहर से संबंधित होने की वजह से गोपाल का पीड़िता के घर आना-जाना था। शनिवार रात्रि गोपाल नशे में पीड़िता के घर टीवी देखने के बहाने पहुंचा। पीड़िता को घर में अकेला पाकर उसने अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। बच्ची ने जब परिजनों से शिकायत करने की बात कही तो आरोपी ने ईंट और बेलन से उसका सिर कुचल दिया। 
 
जांच में पता चला कि आरोपी पहले भी गांव में एक लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में पकड़ा जा चुका है। एक बार उसे बकरी के साथ अप्राकृतिक यौनाचार करने हुए भी पकड़ा गया था। इसके बाद पंचायत ने गोपाल पर जुर्माना लगाकर उसे गांव से बाहर निकाल दिया था। Source:bhaskar

पति बोला, ससुर से सेक्स में बुरा क्या!

Wednesday, 24 October 2012 0 comments

नई दिल्ली।। शादी हुए कुछ ही दिन बीते थे कि बहू की खूबसूरती पर ससुर इस कदर फिदा हुआ कि वह आए दिन उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा। परिवार की इज्जत की खातिर पहले तो वह चुपचाप सहती रही, मगर जब उसकी चुप्पी से ससुर के हौसले बढ़ते चले गए और उसने फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए जोर जबर्दस्ती शुरू कर दी।

जब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो उसने पति को पूरी बात बता दी, मगर जिसके साथ सात फेरे लिए उसकी बात सुनकर वह हैरान रह गई। पति ने कहा कि सेक्स करने में बुराई क्या है। फिर क्या था.... बहू अपनी ससुराल छोड़कर मायके आ गई और सारी बात परिवार को बता दी। अब पति और ससुर पर युवती ने केस दर्ज कराया है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली के नारायणा में परिवार के साथ रहने वाली 20 वर्षीय शालिनी (बदला हुआ नाम) के पिता सरकारी पद पर कार्यरत हैं। जून 2010 में शालिनी की शादी कोलकाता स्थित सियालदाह में सनी प्रसाद के धूमधाम के साथ हुई थी। शालिनी का आरोप है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद उसका ससुर खूबसूरती की तारीफ करते हुए शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा। शुरुआत में यह सब चुपचाप सहती रही मगर बाद में शालिनी से रहा नहीं गया तो उसने पति से शिकायत कर दी।

हैरानी उसे तब हुई जब उसके पति ने भी यह कहा कि हाईप्रोफाइल सोसायटी में यह सब चलता है और सेक्स करने में कोई बुराई नहीं है। ससुराल में यह सब नजारा देखकर उससे रहा नहीं गया और कोलकाता से दिल्ली आ गई। उसने मायके में आकर सारी बात बताई। फिलहाल पति और ससुर के खिलाफ नारायणा थाने में केस दर्ज कराया गया है। पुलिस टीम दोनों की गिरफ्तारी के लिए कोलकाता रवाना की गई है।Source:navbharattimes

सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका

Tuesday, 23 October 2012 0 comments


सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका
नई दिल्ली. हर खेल से जुड़े कुछ ऐसे सच होते हैं जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं. और अगर खेल ही ऐसा हो जिसकी शुरुआत ही बस दो साल पहले हुई हो तो उसके बारे में लोगों में उत्सुकता होना लाजमी है. जहां पश्चिमी देशों में फॉर्मूला वन रेसिंग की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आ रही है वहीं भारत में यह खेल अपने शैशव काल में है. पिछले साल (2011) ग्रेटर नोएडा के बुद्धा इंटरनेशनल सर्किट में ग्रैंड प्रिक्स (जिसे फॉर्मूला वन भी कहते हैं) का पहली बार आयोजन हुआ, जिसे काफी पसंद किया गया. 

आगामी 28 अक्टूबर से यह प्रतियोगिता फिर से इसी स्टेडियम में शुरू हो रही है. इस खेल का असली रोमांच इसकी स्पीड होती है जो देखने वालों को रोमांचित कर देती है.
लेकिन इस चैम्पियनशिप में आकर्षण की एक बड़ी वजह प्रमोशनल मॉडल्स और उनकी पोशाक भी होती है. आमतौर पर इन्हें ग्रिड गर्ल्स कहा जाता है. जहां भारत में इस खेल की लोकप्रियता अपने प्रारम्भिक चरण में है, वहीं इस खेल से जुड़े ऐसे कई तथ्य हैं जिनके बारे में कम लोग ही जानते हैं. इसी खेल से जुड़ी है खूबसूरत ग्रिड गर्ल्स की कहानी. आइये जानते हैं इन गर्ल्स के अनसुने किस्सों का सच...   
   
ग्रिड गर्ल्स का मतलब :
पेशेवर रेसिंग इवेंट चाहे वह मोटरसाइकिल रेसिंग हो, कार रेसिंग हो या फॉर्मूला वन रेसिंग इन सभी चैम्पियनशिप में ग्रिड गर्ल्स (grid girls) का रोल बेहद अहम होता है. ग्रिड गर्ल्स को पैडक गर्ल्स या अम्ब्रेला गर्ल्स (Paddock girls, umbrella girls) भी कहा जाता है. 
ग्रिड गर्ल्स का काम  चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहे रेसर्स को धूप या बरसात से बचाने के लिए छाता लेकर उनके साथ खड़े रहने का होता है.
चैंपियनशिप शुरू होने से पहले रेसर्स अपने ग्रिड (जहां उनकी गाडियां खड़ी होती हैं) में तब तक खड़े रहते है जब तक कि उनकी गाड़ियों की रेस पूर्व चेकिंग और ईंधन भरने का काम पूरा नहीं हो जाता. 
चूंकि इस चैम्पियनशिप के खिलाडी बेहद भारी, गद्देदार चमड़े वाली रेसिंग पोशाक पहनते हैं, ऐसे में उन्हें गर्मी  से बचाने के लिए प्रायोजकों द्वारा ग्रिड गर्ल की सुविधा दी जाती है जो हाथों में छाता लिए रेसर्स को धूप से बचाने का काम करती हैं.
क्यों इतनी आकर्षक होती है इनकी पोशाक: 
ग्रिड गर्ल्स का काम खिलाड़ियों को सिर्फ मदद करना ही नहीं होता. चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही टीमों के प्रायोजक विज्ञापन के लिए भी इनका इस्तेमाल करते हैं. यही कारण है कि इन्हें ग्रिड गर्ल्स के साथ प्रमोशनल मॉडल भी कहा जाता है.
ये मॉडल, आमतौर पर 18-30 वर्ष के उम्र वाली आकर्षक बालाएं होती हैं. इनका पहनावा काफी उत्तेजक होता है जो खेल प्रायोजकों के लोगो / डिजाइन.की ओर ध्यान आकर्षित करने का भी काम करता है. आगे देखिये दुनिया के कुछ ख़ास ग्रिड गर्ल्स की तस्वीरें...


सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका
कोरियाई ग्रैंड प्रिक्स की ग्रिड गर्ल्स

सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका
हंगेरियन फार्मूला वन ग्रैंड प्रिक्स की ग्रिड गर्ल्स
सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका
कोरियाई ग्रैंड प्रिक्स की ग्रिड गर्ल्स
सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका
ब्राज़ीलियाई ग्रैंड प्रिक्स  की ग्रिड गर्ल्स 
सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका
इंडियन ग्रैंड प्रिक्स 2012 की ग्रिड गर्ल्स 
सिर्फ 18 से 30 साल की खूबसूरत बालाओं को मिलता है इस खेल में मौका
ऑस्ट्रेलियन ग्रैंड प्रिक्स की ग्रिड गर्ल्स 
Source:bhaskar

अब 11 डिजिट का मिलेगा मोबाइल नंबर

Monday, 22 October 2012 0 comments


जल्द ही 11 डिजिट का होगा मोबाइल नंबर!
नई दिल्लीदेश में मोबाइल नंबरों का मौजूदा कोटा खत्म होने की कगार पर है। 98 या 99 जैसी सीरीज़ के नए नंबरों का टोटा अगले साल से पड़ने की आशंका है। अगले साल तक देश भर में इस्तेमाल हो रहे मोबाइल नंबर की संख्या एक अरब के आंकड़े को पार कर जाएगी। सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा, 'अगले साल तक नए नंबर नहीं लाए गए तो गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी।'

जल्द ही 11 डिजिट का होगा मोबाइल नंबर!
मोबाइल नंबरों के टोटे के इस संभावित संकट का हल खोजने की कोशिश भी तेज हो गई है। इसके लिए मोबाइल नंबरों की संख्या 11 या 12 डिजिट की जा सकती है। इस बारे में एक प्रस्ताव टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम को दिया है। लेकिन डीओटी अन्य विकल्प भी तलाश कर रहा है।



Source: dainikbhaskar

पत्नी ने दरवाजा खोला तो सामने था पति और 13 साल की किशोरी

Sunday, 21 October 2012 0 comments


नई दिल्ली. 13 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने एक ट्रैवल एजेंट को गिरफ्तार किया है।
 
 
आरोपी मेहंदी हसन पीड़िता को अपने घर में करीब छह माह तक दुष्कर्म का शिकार बनाता रहा। 
 
 
पुलिस के मुताबिक वह न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में ‘हसी बी’ के नाम से ट्रैवल और वीजा एजेंट का काम करता है।
 
 
उसकी इस करतूत का सितंबर में उस वक्त पता चला कि जब उसकी पत्नी ने उसे बच्ची के साथ घर में आपत्तिजनक अवस्था में पाया। 
 
 
मामले के उजागर होने के बाद पुलिस से बचने के लिए वह मलेशिया भाग गया था। सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया है।Source: dainikbhaskar

कहा नौकरी दूंगा फिर युवती को ले गया कमरे में और...

Wednesday, 17 October 2012 0 comments


नई दिल्ली। पंजाबी बाग इलाके में ट्रांसपोर्टर सीएम कश्यप द्वारा नौकरी का झांसा देकर किशोरी से दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया है।


वारदात को अंजाम देने के बाद कश्यप ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। हालांकि पीड़िता ने परिजनों को मामले से अवगत कराया, जिसके बाद स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था।

जानकारी के मुताबिक पीड़िता रचना (16, बदला हुआ नाम) 14 अक्टूबर को कश्यप के पास नौकरी मांगने गई थी। उसने उसे नौकरी का झांसा दिया और कमरे में जबरदस्ती उसे दुष्कर्म का शिकार बना डाला। पुलिस के मुताबिक 15 अक्टूबर को पीड़िता परिवार सहित थाने पहुंची।Source: Dainik Bhaskar

चाउमिन से हो रहे रेप ...

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रेप को लेकर चार विवादित बयान
 

नई दिल्ली। हरियाणा में बलात्कार की घटनाएं रूकने का नाम नहीं ले रही है। इस बीच नेताओं और खाप पंचायतों के उल्टे सीधे बयान जारी हैं। कोई कह रहा है कि चाउमिन खाने से रेप हो रहे हैं तो कोई कह रहा है कि अगर लड़कियों की शादी 15 साल में कर दी जाए तो रेप नहीं होंगे। ऎसे बयानों से साफ जाहिर होता है कि पुरूष प्रधान समाज अभी भी महिलाओं को दोयम दर्जे का ही नागरिक समझता है। 


चाउमिन से हो रहे रेप 

एक खाप नेता ने रेप की बढ़ती घटनाओं के लिए फास्ट फूड को जिम्मेदार ठहराया है। खाप नेता जितेंद्र छत्तर का कहना है कि दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं के पीछे सिनेमा और संस्कृति में आए बदलाव तो वजह है ही लेकिन सबसे प्रमुख कारण है फास्ट फूड यानि चाउमिन,बर्गर और पिज्जा जैसी चीजें। छत्तर ने विशेषज्ञ की तरह तर्क देते हुए कहा कि जब हमलोग फास्ट फूड खाते हैं तो गर्मी पैदा होती है जिससे शरीर में सेक्स हॉर्मोन तेजी से बनने लगता है। इससे उत्तेजना पैदा होती है। हमें फास्ट फूड खाने के बाद कुछ ठंडी चीजें खानी चाहिए। 

15 की उम्र में शादी हो तो नहीं होंगे रेप

इससे पहले खाप नेता सूबे सिंह ने कहा था कि अगर लड़कियों की शादी 15 साल में ही करवा दी जाए तो रेप की घटनाएं नहीं होगी। सूबे सिंह से पूछा गया कि राज्य में बलात्कार की घटनाएं क्यों बढ़ रही है तो उन्होंने कहा कि इसकी वजह टीवी और फिल्में है। 

सिंह ने कहा कि ऎसी घटनाएं इसलिए बढ़ रही है क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी फिल्मों और टीवी से बुरी तरह प्रभावित है। मेरा मानना है कि लड़कियों की शादी 15 साल में ही कर देनी चाहिए। इससे उनकी सेक्स की डिमांड पति पूरी कर देगा और उन्हें कहीं और जाने की जरूरत नहीं होगी। ऎसा होने पर रेप भी नहीं होंगे। 

"रेप नहीं सहमति से हो रहा है सेक्स"

हरियाणा के कांग्रेसी नेता धर्मवीर गोयल का कहना है कि रेप के 90 फीसदी मामलों में आपसी सहमति से सेक्स होता है। बात बिगड़ने पर रेप का आरोप लगा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर रेप के मामलों की तह तक जाएं तो पता चलेगा कि पीडिता और आरोपी भागने वाले कपल होते हैं। 

खाप के सुर में मिलाए सुर 

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने खाप पंचायत के उस सुझाव का समर्थन किया है जिसमें कहा गया था कि अगर लड़कियों की शादी 15 साल में कर दी जाए तो बलात्कार नहीं होंगे। चौटाला ने कहा कि मुगलों के शासन के दौरान आक्रांताओं से रक्षा के लिए बेटियों की छोटी उम्र में शादी कर दी जाती थी। राज्य में भी ऎसे ही हालात उत्पन्न हो रहे हैं। हमें इतिहास से सबक लेना चाहिए और खाप पंचायतों के उस सुझाव को मान लेना चाहिए। मैं खाप पंचायत के सुझाव का समर्थन करता हूं। Source: Patrika

रफ़्तार 24 न्यूज़