Showing posts with label Religions. Show all posts
Showing posts with label Religions. Show all posts

क़ियामत की छोटी और बड़ी निशानियाँ

Sunday, 28 April 2013 0 comments

हर प्रकार की हम्द व सना (प्रशंसा और गुणगान) अल्लाह के लिए योग्य है, हम उसी की प्रशंसा करते हैं, उसी से मदद मांगते और उसी से क्षमा याचना करते हैं, तथा हम अपने नफ्स की बुराई और अपने बुरे कामों से अल्लाह की पनाह में आते हैं, जिसे अल्लाह तआला हिदायत दे दे उसे कोई पथभ्रष्ट (गुमराह) करने वाला नहीं, और जिसे गुमराह कर दे उसे कोई हिदायत देने वाला नहीं।

क़ियामत की छोटी और बड़ी निशानियाँ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।
क़ियामत की निशानियों से अभिप्राय वह चीज़ें है जो क़ियामत आने से पहले घटित होंगीं और उसके आगमन के निकट होने का पता देंगीं। उन निशानियों को दो भागों में विभाजित किया गया है : छोटी और बड़ी।
छोटी निशानियाँ -सामान्यता- क़ियामत के आने से एक लम्बी अवधि पूर्व घटित होंगीं, जिन में से कुछ घटित होकर समाप्त हो चुकी हैं -और कभी कभार वह पुन: घटित होती रहती हैं- और उनमें से कुछ निशानियाँ प्रकट हो चुकी हैं और निरंतर प्रकट हो रही हैं, और कुछ निशानियाँ अभी तक अस्तित्व में नहीं आई हैं, किन्तु वे प्रकट होंगी जैसाकि सादिक़ व मस्दूक़ (सत्यनिष्ट) पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म ने इसकी सूचना दी है।
बड़ी निशानियाँ : ये ऐसी बड़ी चीज़ें हैं जिनका प्रकट होना क़ियामत के निकट होने और उस महान दिन के आने में केवल थोड़ा ही समय बाक़ी रहने का पता देगा।
क़ियामत की छोटी निशानियाँ बहुत हैं, और बहुत सारी सहीह हदीसों में उनका वर्णन आया है, जिन्हें हम एक क्रम में उल्लेख करेंगे, उनकी हदीसों का उल्लेख नही करेंगे ; क्योंकि यह स्थान उनको नहीं समा सकता, और जो व्यक्ति इस विषय के बारे में विस्तार के साथ इन निशानियों के प्रमाण जानना चाहता है, उसे हम विश्वसनीय विशिष्ट पुस्तकों का हवाला देंगे, उन्हीं पुस्तकों में से शैख उमर सुलैमान अल-अश्क़र की किताब "अल-क़ियामतुस्सुग्रा" और शैख यूसुफ अल-वाबिल की किताब "अश्रातुस्साअह"  है।
क़ियामत की छोटी निशानियों में से कुछ निम्नलिखित हैं :
1- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का पैग़ंबर बनाकर भेजा जाना।
2- आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का देहान्त होना।
3- बैतुल मक्दिस की विजय।
4- फिलिस्तीन के "अम्वास" नामीनगर का ताऊन (महामारी, प्लेग)
5- धन की बहुतायत और सद्क़ा व खैरात से बेनियाज़ी।
6- फित्नों (उपद्रव) का प्रकट होना, उन्हीं में से इस्लाम के प्रारंभिक युग में उत्पन्न होने वाले फित्ने हैं : उसमान रज़ियल्लाहु अन्हु की हत्या, जमल और सिफ्फीन की लड़ाई, खवारिज का प्रकट होना, हर्रा की लड़ाई और क़ुर्आन को मख्लूक़ कहने का फित्ना।
7- नबी (ईश्दूत) होने का दावा करने वालों का प्रकट होना, उन्हीं नुबुव्वत (ईश्दूतत्व) के दावेदारों में से "मुसैलमा कज़्ज़ाब" और "अस्वद अंसी" हैं।
8- हिजाज़ (मक्का और मदीना के क्षेत्र को हिजाज़ कहा जाता है) से आग का प्रकट होना, और यह आग सातवीं शताब्दी हिज्री के मध्य में वर्ष 654 हिज्री में प्रकट हुई थी, और यह एक बड़ी आग थी, इस आग के निकलने के समय मौजूद तथा उसके पश्चात के उलमा ने इसका सविस्तार वर्णन किया है, इमाम न-ववी कहते हैं : "हमारे ज़माने में वर्ष 654 हिज्री में मदीना में एक आग निकली, यह मदीना के पूरबी छोर पर हर्रा के पीछे एक बहुत बड़ी आग थी, पूरे शाम (सीरिया) और अन्य सभी नगरों में निरंतर लोगों को इसका ज्ञान हुआ, तथा मदीना वालों में से जो उस समय उपस्थित थे उन्हों ने मुझे इसकी सूचना दी।"
9- अमानत का नाश होना, और अमानत को नाश करने का एक रूप लोगों के मामलों की बागडोर को ऐसे अक्षम और अयोग्य लोगों के हवाले कर देना है जो उसको चलाने की क्षमता और योग्यता नहीं रखते हैं।
10- ज्ञान का उठा लिया जाना और अज्ञानता का प्रकट होना, और ज्ञान का उठना उलमा (ज्ञानियों) के उठाये जाने के कारण होगा, जैसाकि सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम में इसका वर्णन आया है।
11- व्यभिचार (ज़िनाकारी) का फैलाव और प्रचलन।
12- सूद (व्याज) का प्रचलन।
13- गायन और संगीत उपकरण का उदय।
14- शराब (मदिरा) पीने की बहुतायत।
15- बकरियों के चराने वालों का भवनों में गर्व करना।
16- लौंडी का अपने मालिक को जनना, जैसाकि सहीह बुखारी एवं मुस्लिम में यह प्रमाणित है। इस हदीस के अर्थ के बारे में विद्वानों के कई कथन हैं, हाफिज़ इब्ने हजर ने इस अर्थ को चयन किया है कि : बच्चों में माता-पिता की नाफरमानी की बहुतायत हो जायेगी, चुनाँचि बेटा अपनी माँ से इस प्रकार व्यवहार करेगा जिस प्रकार कि लौंडी का मालिक अपनी लौंडी से अपमानता और गाली गलोज के साथ व्यवहार करता है।
17- हत्या (क़त्ल) का बाहुल्य।
18- भूकम्पों का अधिक आना।
19- धरती में धंसने, रूप के बदल दिये जानेऔर दोष तथा आरोप लगाने का उदय।
20- कपड़े पहनने के उपरांत भीनग्न दिखने वाली महिलाओं का प्रकट होना।
21- मोमिन के सपने का सच्चा होना।
22- झूठी गवाही की बहुतायत और सच्ची गवाही को छुपाना।
23- महिलाओं काबाहुल्य।
24- अरब की धरती का चरागाहोंऔर नदियों वाला बन जाना।
25- फरात नदी का सोने के पहाड़ को प्रकट करना।
26- दरिंदों और जमादात का मनुष्यों से बात-चीत करना।
27- रूमियों की संख्या का अधिक होना और उनका मुसलमानों से लड़ाई करना।
28- क़ुस्तुनतीनिया पर विजय।
क़ियामत की बड़ी निशानियाँ : येवह निशानियाँ हैं जिन्हें नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हुज़ैफा बिन उसैद की हदीस में उल्लेख किया है और वह दस निशानियाँ हैं : दज्जाल, ईसा बिन मरियम का उतरना, याजूज माजूज, तीन बार धरती का धंसना : एक बार पूरब में धंसना, और एक बार पच्छिम में धंसना, और एक बार अरब द्वीप में धंसना, धुँआ, सूरज का पच्छिम से निकलना, चौपाया, वह आग जो लोगों को उनके मह्शर (क़ियामत के दिन एकत्र होने के स्थान) की तरफ हाँक कर ले जायेगी। ये निशानियाँ एक के पीछे एक प्रकट होंगी, जब इन में से पहली निशानी प्रकट होगी तो दूसरी उसके पीछे ही प्रकट होगी।
इमाम मुस्लिम ने हुज़ैफा बिन उसैद अल-ग़िफारी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि उन्हों ने कहा कि : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आये और हम आपस में स्मरण कर रहे थे, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने पूछा : तुम लोग क्या स्मरण कर रहे हो लोगों ने कहा : हम क़ियामत का स्मरण कर रहे हैं, आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : क़ियामत नहीं आयेगी यहाँ तक कि तुम उस से पहले दस निशानियाँ देख लो, चुनाँचि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उल्लेख किया कि : धुँआ, दज्जाल, चौपाया, सूरज का पच्छिम से निकलना, ईसा बिन मरियम का उतरना, याजूज माजूज, तीन बार धरती का धंसना : एक बार पूरब में धंसना, और एक बार पच्छिम में धंसना, और एक बार अरब द्वीप में धंसना, और अंतिम निशानी वह आग होगी जो यमन से निकलेगी और लोगों को उनके मह्शर (क़ियामत के दिन एकत्र होने के स्थान) की तरफ खदेड़ कर ले जाये गी।"
इन निशानियों के क्रम (तरतीब) के बारे में कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है, बल्कि कुछ नुसूस (हदीस के मूलशब्दों) से उनके क्रम का पता चलाया जाता है।
शैख मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन रहिमहुल्लाह से प्रश्न किया गया कि :
क्या क़ियामत की बड़ी निशानियाँ क्रमानुसार प्रकट हों गी
तो उन्हों ने जवाब दिया :
“क़ियामत की बड़ी निशानियाँ कुछ तो क्रमबद्ध हैं और ज्ञात हैं, और कुछ क्रमबद्ध नहीं हैं और उनके क्रम का कोई ज्ञान नहीं है, जो निशानियाँ क्रमबद्ध हैं उनमें से ईसा बिन मरियम का उतरना, याजूज माजूज का निकलना, और दज्जाल है। क्योंकि (पहले) दज्जाल भेजा जायेगा, फिर ईसा बिन मरियम उतरेंगे और उसे क़त्ल करेंगे, फिर याजूज माजूज निकलेंगे।
सफ्फारीनी रहिमहुल्लाह ने अपने अक़ीदा की किताब में इन निशानियों को क्रमबद्ध किया है, किन्तु इस क्रम में से कुछ पर तो मन सन्तुष्ट होता है और कुछ पर ऐसा नहीं है, हालांकि क्रम हमारे लिए महत्व नहीं रखता, हमारे लिए केवल यह महत्वपूर्ण है कि क़ियामत की कुछ ब़ड़ी-बड़ी निशानियाँ हैं, जब ये प्रकट होंगींतो क़ियामत निकट आ चुकी होगी, और अल्लाह तआला ने क़ियामत की कुछ निशानियाँ इसलिए निर्धारित कर दी हैं ; क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण घटना है जिसके घटित होने की निकटता पर चेतावनी देने की लोगों को आवश्यकता है।”
मज्मूउल फतावा (2 / प्रश्न संख्या : 137)
और अल्लाह ही सबसे अधिक जानता है।
इस्लाम प्रश्न और उत्तर

अब खुलेगी गुरुघंटाल बाबाओं की पोल!

Monday, 25 March 2013 0 comments



रफ़्तार  24 न्यूज। इंटरनेट डेस्क


जादू टोना, वशीकरण, काला जादू के नाम पर आए दिन लाखों रूपयों की ठगी का वारदातें सामने आती रहती हैं। भोले.भाले लोग इन गुरूघंटाल बाबाओं के झांसे में आ जाते हैं। काला जादू सम्भव है या नहीं इसे लेकर तो एक लंबी बहस जारी है। एक ओर साइंस में भी वशीकरण या हिप्नोटिशम मौजूद है। परन्तु गली.मुहल्लों में खुली बाबाओं की दुकानों पर बैठे महाशय कितने ज्ञानी है इसका तो आए दिन खुलासा होता ही रहता है। सबसे दुखद बात यह है कि ठगी के शिकार पीडि़त बदनामी के डर से शिकायत भी नहीं करते।
याद रखिए! आपकी शिकायत से भले ही आपका पैसा वापस न मिले। परन्तु आप जैसे  तमाम मासूम लोग इस गोरखधंधे से गुमराह होने से बच सकते हैं।
हम बनेंगे आपकी आवाज... अपनी शिकायतें हमें इमेल करें आपका नाम, पता आदि बिल्कुल गोपनीय रखा जाएगा। अगर आप चाहते हैं सबसे सामने आना अपनी असली पहचान के साथ तो भी हम आपके साथ हैं, बस ईमेल के अंत में लिख दें कि आपकी पहचान गोपनीय न रखी जाए।
हम हर शिकायत को निष्पक्ष प्रकाशित करेंगे, जिससे अन्य लोग फंसने से बस सकें। साथ ही अगर कोई झूठी शिकायत हम तक पहुंचती है तो आरोपी भी पूर्ण स्वतंत्र हैं, वे भी हमें ईमेल करें हम उन्हें भी निष्पक्षता के साथ प्रकाशित करेंगे। इस मुहिम में हमारी कोशिश सिर्फ और सिर्फ सच सामने लाने की होगी। आपसे वादा है किसी भी प्रकार से किसी बाबा आदि का विज्ञापन, खबर हम पैसे के लालच में कतई प्रकाशित नहीं करेंगे। सिर्फ और सिर्फ सच सामने लाना हमारा मकसद होगा।


हमारी ईमेल आईडी है- raftar24news@gmail.com  and editor@raftaar24news.com

हज्ज के बाद कुछ वसीयतें

Sunday, 18 November 2012 0 comments



बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
मैं अति मेहरबान और दयालु अल्लाह के नाम से आरम्भ करता हूँ।
إن الحمد لله نحمده ونستعينه ونستغفره، ونعوذ بالله من شرور أنفسنا، وسيئات أعمالنا، من يهده الله فلا مضل له، ومن يضلل فلا هادي له، وبعد:

हर प्रकार की हम्द व सना (प्रशंसा और गुणगान) केवल अल्लाह के लिए योग्य है, हम उसी की प्रशंसा करते हैं, उसी से मदद मांगते और उसी से क्षमा याचना करते हैं, तथा हम अपने नफ्स की बुराई और अपने बुरे कामों से अल्लाह की पनाह में आते हैं, जिसे अल्लाह तआला हिदायत प्रदान करदे उसे कोई पथभ्रष्ट (गुमराह) करने वाला नहीं, और जिसे गुमराह कर दे उसे कोई हिदायत देने वाला नहीं। हम्द व सना के बाद %

हज्ज के बाद कुछ वसीयतें
हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए है, तथा अल्लाह की दया अवतरित हो उस व्यक्तित्व पर जिसके बाद कोई ईश्दूत नहीं। इसके बाद:
अल्लाह की सबसे बड़ी अनुकंपा और अनुग्रह है कि उसने हमें सर्वश्रेष्ठ मानवता मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत में से बनाया है, इस्लाम हमारा धर्म है, अल्लाह तआला का फरमान है %

]وَمَن يَبْتَغِ غَيْرَ الإِسْلاَمِ دِيناً فَلَن يُقْبَلَ مِنْهُ وَهُوَ فِي الآخِرَةِ مِنَ الْخَاسِرِينَ [ [آل عمران:85]

^^और जो व्यक्ति इस्लाम के सिवा कोई अन्य धर्म ढूंढ़ेगा, तो वह (धर्म) उस से स्वीकार नहीं किया जायेगा, और वह आखिरत में घाटा उठाने वालों में से होगा।’’ (सूरत आल-इम्रान: 85)
और कु़रआन हमारा संविधान है
﴿إِنَّ هَذَا الْقُرْآنَ يَهْدِي لِلَّتِي هِيَ أَقْوَمُ[الإسراء : 9]
^^निःसंदेह यह क़ुर्आन वह रास्ता दिखाता है जो सबसे सीधा है।’’ (सूरतुल इस्रा: 9).
और हमारे संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं।
﴿وإنك لعلى خلق عظيم﴾ [القلم : 4]
^^निःसंदेह आप महान स्वभाव (चरित्र) से सुसज्जित हैं।’’ (सूरतुल क़लम: 4).
और हमारा कि़ब्ला (दिशा) काबा है।
﴿وَحَيْثُمَا كُنْتُمْ فَوَلُّوا وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُ [البقرة : 144].
^^और आप जहाँ कहीं भी हों, अपने चेहरे को उसी (यानी मस्जिदुल हराम) की दिशा की ओर फेरा करें।’’ (सूरतुल बक़रा: 144)
जी हा,ँ मेरे प्यारे भाई! मैं आप से सहमत हूँ कि यह अल्लाह तआला का शुक्रिया अदा करने की अपेक्षा करता है, और मैं अल्लाह सर्वशक्तिमान का शुक्रिया अदा करने के बाद आपके समक्ष उस व्यक्ति के लिए जो पवित्र स्थान से वापस आया है ये वसीयतें प्रस्तुत कर रहा हूँ, अल्लाह तआला से प्रार्थना है कि वह हमें इनसे लाभ पहुँचाए:
1. इस मुबारक कर्तव्य के पूरा करने पर अल्लाह तआला का आभारी होना। अल्लाह तआला का फरमान है %
﴿لَئِنْ شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ  [ ابراهيم : 7]
^^यदि तुम शुक्रिया अदा करोगे तो अवश्य मैं तुम्हें अधिक प्रदान करूँगा।’’ (सूरत इब्राहीम: 7)
2. हज्ज को हमारे जीवन में परिवर्तन और बदलाव का बिंदु होना चाहिए। अल्लाह तआला का फरमान है %
﴿إِنَّ اللَّهَ لا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّى يُغَيِّرُوا مَا بِأَنْفُسِهِمْ   [الرعد : 11]
^^निःसंदेह अल्लाह किसी क़ौम की हालत नहीं बदलता जब तक कि वे ख़ुद न बदल लें उस स्थिति को जो उनके दिलों में है।’’ (सूरतुर् राद: 11)
3. लोग हज्ज से हदिया (यानी तोहफे तहायफ) के साथ वापस लौटते हैं जबकि वास्तव में हमें हिदायत (मार्गदर्शन) के साथ वापस लौटना चाहिए। अल्लाह तआाला का फरमान है %
﴿اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ [الفاتحة :6]  
^^हमें सीधा (सत्य) रास्ता दिखा।’’ (सूरतुल फातिहा: 6)
4- हम आस्था व श्रद्धा के एक व्यवहारिक शिविर से बाहर निकले हैं, अतः हमें चाहिए कि हमने जो कुछ सीखा है उस पर निरंतरता के साथ बने रहें। अल्लाह तआला का फरमान है %
﴿والعصر إن الانسان لفي خسر إلا الذين آمنوا وعملوا الصالحات وتواصوا بالحق وتواصوا بالصبر [العصر : 1-3]
^^ज़माने की क़सम निःसंदेह इंसान पूर्णतः घाटे में है, सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक काम किए, और (जिन्हों ने) आपस में एक दूसरे को सत्य (हक) की वसीयत की और एक दूसरे को सब्र करने की नसीहत की।’’ (सूरतुल अस्र: 1-3). 
5. आप इस बात को न भूलें कि:
  ﴿إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ إِخْوَةٌ [الحجرات :10]
^‘निःसंदेह सभी मुसलमान भाई भाई हैं।’’ (सूरतुल हुजुरात: 10).
6. आप ने उन सुंदर दिनों में कितने बार ही अपने पालनहार व सृष्टा से प्रार्थना करते हुए अपने दोनों हाथों को उठाए हैं, तो इस प्रक्रिया को बंद न करें। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: ‘‘दुआ करना ही इबादत है।’’
7. आपका नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत का पालन करना और उसका लालसी होना बहुत अच्छी बात है, तो आपका अपने पूरे जीवनकाल में यही स्वभाव होना चाहिए। हदीसे क़ुदसी में है: ‘‘ . . . मेरा बंदा निरंतर नवाफिल (ऐच्छिक कामों) के द्वारा मेरी निकटता प्राप्त करता रहता है यहाँ तक कि मैं उससे मोहब्बत करने लगता हूँ . . .’’
8. आप अपने पालनहार के साथ अच्छा गुमान रखते हुए वापस लौटे हैं और आप अपने गुनाहों से उस दिन की तरह निकल चुके हैं जिस दिन कि आपकी माँ ने आपको जना था, तो आप अपने दिल के प्रकाश को गुनाहों के कीचड़ से न बुझायें।
9. शायद आप ने अपने पालनहार व सृष्टा से गुनाहों से पश्चाताप (तौबा) की प्रतिज्ञा की होगी तो अब आप उसकी तरफ वापस लौटने से बचें।
﴿رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا﴾ [آل عمران :8]
‘‘हे हमारे पालनहार! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिल टेढ़े न कर दे।’’ (सूरत आल-इम्रान: 8).
10. सबसे महान चीज़ जो आपको इस्तिक़ामत पर सुदृढ़ रख सकती है वह अल्लाह के मार्ग की तरफ लोगों को बुलाना है
﴿ وَمَنْ أَحْسَنُ قَوْلا مِمَّنْ دَعَا إِلَى اللَّهِ وَعَمِلَ صَالِحًا وَقَالَ إِنَّنِي مِنَ الْمُسْلِمِينَ [فصلت :33]
^^और उस से अधिक अच्छी बात वाला कौन है जो अल्लाह की तरफ बुलाये, नेकी के काम करे, और कहे कि मैं यक़ीनी तौर से मुसलमानों में से हूँ।’’ (सूरत फुस्सिलत: 33).
मेरे हाजी भाई ! हज्ज से वापस आने के बाद आप अपने दिल से पूछें कि क्या कुछ थकावट बाक़ी रह गई है ?
निःसंदेह आपका यही उत्तर होगा कि नहीं।
इसी तरह दुनिया के जीवन में हम अल्लाह के लिए थकावट और परेशानी उठातें है अतः वह इसके बाद हमें ऊँचे बागों में अनन्त आराम प्रदान करेगा जहाँ आप कोई व्यर्थ व बुरी बात नहीं सुनेेंगे। हम अल्लाह तआला से उसकी अनुकंपा और कृपा का प्रश्न करते हैं।   

रफ़्तार 24 न्यूज़