अब इस मराठी मॉडल ने करवाया प्लेबॉय के लिए न्यूड फोटोशूट

Sunday, 28 April 2013 0 comments



महाराष्ट्र की मॉडल निकिता गोखले ने मैन्स मैगजीन प्लेबॉय के लिए टेस्ट शूट करवाया है। नागपुर की रहने वाली निकिता को मैगजीन के फोटोग्राफर ऐरोल फ्रैंकलिन द्वारा इस शूट के लिए इन्वाइट किया गया था। अगर निकिता की टेस्ट फोटोग्राफ एप्रूव कर ली जाती हैं तो निकिता दूसरी भारतीय फीमेल मॉडल होंगी जिन्होंने प्लेबॉय के लिए फोटोशूट करवाया है। 
एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में फोटोग्राफर फ्रैंकलिन ने कहा, "मैंनै कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की मॉडल्स का फोटोशूट किया है। निकिता से जान-पहचान फेसबुक पर एक कॉमन फ्रैंड के जरिए हुई। मैंने उसे प्रपोजल दिया कि वो क्लासिक इंडियन थीम के लिए तस्वीरें खिंचवा सकती है। निकिता ने हां कर दी और हमने दिवाली से पहले मुंबई में ये फोटोशूट किया। 
हालांकि निकिता ने फोटोग्राफर के साथ कॉंट्रेक्ट की वजह से फोटोशूट के बारे में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।

कोकीन से भी ज्‍यादा नशा होता है सच्‍चे प्‍यार में

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अगर आपने सच्‍चा प्‍यार किया है तो तड़प भी महसूस करते होंगे। क्‍योंकि प्‍यार करने के लिए केवल दिल जिम्‍मेदार नहीं बल्कि दिमाग भी जिम्‍मेदार है।
शोध के अनुसार किसी से प्यार होने में मुख्य भूमिका दिमाग की होती है न कि दिल की। 
यह अध्ययन स्टेट विश्वविद्यालय के लिए शोधकर्ताओं ने किया। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि समान्य भाषा में समझा जाए तो एक प्रेमी या प्रेमिका को अपने पार्टनर के लिए वैसी ही तड़प महसूस होती है जैसी मादक पदार्थ कोकीन का नशा करने वालों को कोकीन के लिए होती है। 

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके लिए दिमाग जिम्मेदार होता है न कि दिल। इसलिए जब आपको किसी से प्यार होता है तो वह दिमाग के कारण होता है और प्‍यार को पाने के लिए जो तड़प आप महसूस करते हैं उसके लिए दिमाग ही उकसाता है।

200 की चोरी 10,000 में जमानत...11 महीने जेल...

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नई दिल्ली। 200 रूपये की चोरी हुई, हमारी बहादुर पुलिस ने आरोपी को गिरफतार कर जेल में डाल दिया। तारीख पर तारीख पड़ती रही। जमानत की अर्जी देने पर 10,000 जमानत राशि रखी गई। गरीब लड़का नहीं जमा कर पाया 10,000 रूपये। 10 मिनट से ज्यादा सुनवाई भी न हुई। 11 महीने तक जेल में सड़ता रहा 19 साल का बेकसूर नौजवान।
रूह कांपने वाली घटना राजधानी दिल्ली में घटित हुई। एक व्यक्ति का बटुआ सब्जी बाजार में चोरी हुआ। उसमें 200 रूपये थे। उसने पुलिस को 100 नम्बर पर सूचित किया। बहादुर पुलिस उसी रात पहुंची सब्जी मंडी। एक 19 साल के मुद्दकस को सिर्फ इसीलिए गिरफतार किया गया, क्योंकि उसके पास बटुआ था। जिसमें 200 रूपये थे।
शिकायतकर्ता ने साफ बता दिया कि यह बटुआ उसका नहीं है। पर हमारी बहादुर पुलिस को इतनी फुरसत कहां कि किसी बेकसूर को छोड़ने की जहमत उठाऐ। उसे कोर्ट में पेश किया गया। जज साहब ने लड़के को बोलने तक से मना कर दिया। आगे के केसों की सुनवाई के लिए बोलकर उसे जेल भिजवा दिया गया। 3 महीने तक एक बेकसूर जेल में बेवजह सड़ता रहा। इस बीच उसके पिता का देहांत हो गया। जिसकी सूचना तक उस मासूम को नहीं मिली।
ह्यूमन राईट्स की एक कार्यकर्ता से उसकी मुलाकात हुई। लगा अब जल्द जेल से बाहर जाएगा वह। उस कार्यकर्ता ने मुद्दकस की जमानत अर्जी दाखिल की। जज साहब ने जमानत राशि 10,000 रूपये जमा कराने का आदेश दिया। यह सुनते ही मुद्दकस के पैरो के नीचे से जमीन निकल गयी। एक गरीब लड़का जिसने अपनी जिंदगी में 10,000 रूपये एक साथ शायद ही कभी देखें हों। वह कहां से लाऐं 10,000 रूपये।
फिर शुरू हुआ तारीखों का सिलसिला और बीत गए पूरे 11 महीने, इस बीच जज साहब को यह केस सुनना बहुत छोटा लगा और हर बार बस 5-6 मिनट में सुनवाई पूरी कर दी जाती। हर बार मुद्दकस से गुनाह कुबूल करने को कहा गया। एक बार भी उसे बेगुनाह मानकर उसकी बात नहीं सुनी गयी।
पूरा मामला शीशे की तरह बिल्कुल साफ था। शिकायतकर्ता ने साफ बोल दिया था कि यह बटुआ उसका नहीं है। फिर भी उसे जेल में सड़ाया गया।
जज साहब द्वारा किए गए व्यवहार को दोगलापन ही कहा जा सकता है। एक ओर उन्हें केस इतना छोटा लगा कि इसे सुनने का उनके पास वक्त ही नहीं। दूसरी ओर समाज के लिए आरोप को बेहद घातक बताते हुए जेल में डाल दिया। 200 रूपये की चोरी के लिए 10,000 रूपये जमानत राशि क्यो?
पूरे 11 महीने बीतने के बाद मजबूर होकर मुद्दकस ने वह गुनाह कुबूल कर लिया, जो उसने कभी किया ही नहीं। इसके बाद जज साहब का हुकूम कुछ यूं था ..मुद्दकस अंसारी ने अपना गुनाह कुबूल किया इसीलिए उसे 3 महीने की सजा सुनाई जाती है। लेकिन उसने पहले ही 11 महीने जेल में बिता दिए हैं। इसलिए उसे छोड़ दिया जाए।
इन सब में दोष किसका है? कानून व्यवस्था? जज साहब का रवैया? पुलिस प्रशासन? सवाल तो कई हैं, पर जवाब कोई नहीं। अगर 11 महीने पहले ही मुद्दकस की बात एक बार इतमिनान से सुन ली जाती, तो शायद दवा के अभाव में मरा उसका बाप जिंदा होता। जवानी के 11 महीने उसे जेल में नहीं गुजारने पड़ते। उसका परिवार भुखमरी की कगार पर नहीं पहुंचता।

फेसबुक पर इश्‍क, शादी और अब तलाक !

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इंदौर। फेसबुक पर एक लड़के से प्यार होने के बाद दिल्ली जाकर शादी करने वाली लड़की ने अब अपने माता-पिता के साथ रहने की बात कही है। लड़की की मर्जी को देखते हुए उसे माता-पिता के पास भेज दिया गया है। गौरतलब है कि लसूड़िया थाना क्षेत्र के एक रसूखदार परिवार की बेटी पूजा को छह महीने पहले फेसबुक पर पंजाब के गांव जैतो के एक लड़के शविंदरसिंह से प्यार हो गया था।
 
15 अप्रैल को शविंदर इंदौर आकर पूजा को अपने साथ दिल्ली ले गया था और यहां दोनों ने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली थी। वहां से दोनों जैतो चले गए थे। इसके बाद सूचना मिलने पर पूजा के पिता और भाई पुलिस को साथ लेकर वहां पहुंचे और एसडीएम के सर्च वारंट के आधार पर उसे इंदौर ले आए।
 
यहां एसडीएम रजनीश कसेरा की कोर्ट में पूजा के बयान लिए गए। पूजा ने खुद को बालिग बताते हुए अपने माता-पिता के साथ रहने की इच्छा जाहिर की। इस पर कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि पूजा को उसके माता-पिता के पास पहुंचाया जाए। 
 
लसूड़िया टीआई बसंत मिश्रा ने बताया कोर्ट के निर्देश पर लड़की के बयान और शपथ पत्र लेने के बाद उसे परिजनों के साथ भेज दिया है।

6 दिवसीय योग शिविर 7 मई से शुरू

Saturday, 27 April 2013 0 comments



बराड़ा। रहमदीन

जीवन जीने की कला भाग 1 के तहत गांव अधोया में चल रहे पांच दिवसीय  योग शिविर में चौथे दिन बंगलौर से आये योग प्रशिक्षिकों ने स्थानीय लोगों को योग के गुर सिखाए। 
महाराजा अग्रसेन सभा के सौजन्य से चल रहे इस योग शिविर में प्रतिदिन अनेकों लोग अपने रोगों को दूर करने के बारे में गुर सीख कर योग से जुड़ रहे है। योग शिविर में योग की अनेकों विधियों के बारे में  जैसें कि प्राणायाम, उज्जई, सुदर्शन, व्रजासन आदि योग विधियों को सिखाया गया। 
योग प्रशिक्षक नीलीमा गुप्ता और भावना पाल ने बताया कि योग करने से जहां व्यक्ति की शारीरिक बीमरियां तो ठीक होती ही है तो वहीं दूसरी ओर व्यक्ति का मानसिक तनाव भी दूर होता है।  इस योग शिविर में जहां नौजवान ज्यादा रूचि दिखा रहे है तो वहीं अधिक आयु के लगभग 50 से 60 साल के बजुर्ग भी योग सीया रहे है। नीलीमा गुप्ता ने बताया कि वह योग शिविरों में लोगों का अधिकाशं यही कहती है कि वह ज्यादा ध्यान रोग पर न देकर योग प्रक्रिया पर दे। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार का योग शिविर 7 मई से 12 मई तक सोहन लाल बी.एड. कालेज अंबाला शहर में किया जायेगा। यह योग शिविर सुबह शाम दोनों सत्रों में चलाया जायेगा। जिसमें कि अनेकों लोग योग शिविर में भाग लेकर योग की अनेकों विधियों के बारे में जानकारी लेगें। 
इस अवसर पर  महाराजा अग्रसेन सभा के  प्रधान बरजेश बंसल, उप प्रधान आशीष गर्ग, अशोक, ओम प्रकाश आदि उपस्थित थे। 

यूपी में मां के सामने बेटी से गैंगरेप

Friday, 26 April 2013 0 comments


बुलंदशहर। जिले के एक गांव में मां के साथ घर लौट रही युवती को बाग में खींच कर तीन दबंगों ने गैंगरेप किया। बुधवार को दिनदहाड़े हुई वारदात से लोग सकते में हैं। पीड़ित की मां ने गुरुवार को छतारी थाने में दो लोगों को नामजद कर तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने युवती का मेडिकल कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित की मां ने जिस युवक को मुख्य आरोपी बताकर नामजद किया है, उसकी बहन के साथ फरवरी 2012 में गैंगरेप हुआ था। उस मामले में शिकायतकर्ता महिला का बेटा मुख्य आरोपी है। मां-बेटी बुधवार दोपहर रिश्तेदारी से घर लौट रही थीं तब यह घटना हुई। दहशत के मारे बुधवार को परिवार सहमा रहा और पुलिस में शिकायत कराने की हिम्मत नहीं हुई। बृहस्पतिवार को पीड़ित बेटी को लेकर मां छतारी थाने पहुंची और तहरीर देकर कार्रवाई की गुहार लगाई। पुलिस ने दो नामजद समेत तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
source:B4M

वह अपनी उम्र के लड़कों के साथ सेक्स करना चाहती है, न कि बड़े उम्र के मर्दों के साथ

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आज 26 अप्रेल, 2013 को मैं अपने परिचत के यहॉं पर बैठा था। कुछ पल के लिये मैं वहॉं पर अकेला हुआ तो एक लड़की मेरे पास आयी। मुझ से नमस्ते किया। पूछा ‘‘सर क्या आप डॉक्टर हैं?’’ मैंने कहा ‘‘हॉं’’, वह बोली ‘‘सर मेरी बीमारी का इलाज करें। मैं बहुत परेशान हूँ।’’
इतने में वे महाशय जिनके यहॉं पर मैं गया था, प्रकट हो गये। मैंने उनसे पूछा कि ‘‘ये बच्ची किसकी है? ये बच्ची अपनी किसी बीमारी के बारे में बात कर रही है। इसे क्या तकलीफ है?’’ इस पर उन्होंने बताया कि ‘‘पड़ोस के मकान में रहने वाले किरायेदार की बेटी है, लेकिन मुझे नहीं पता इसे क्या तकलीफ है......।’’
इतना कहने के बाद वे उस लड़की की ओर मुखातिब होकर बोले, ‘‘क्यों बेटी तुम्हें क्या तकलीफ है, तुम्हारे पापा को बुला लाओ डॉक्टर साहब को दिखा देंगे।’’ इस पर लड़की ने कहा, ‘‘नहीं अंकल नहीं, कोई बात नहीं....!’’ लड़की के चेहरे के हावभाव देखकर मुझे कुछ संशय हुआ तो मैंने अपने मित्र से इशारे में अन्दर जाने को कहा।

उनके जाते ही लड़की बोली, ‘‘डॉक्टर साहब आपने तो मरवाया होता, अंकल से बोलने की क्या जरूरत थी। मेरी ऐसी व्यक्तिगत समस्या है, जिसके बारे में, मैं मेरे पापा और इन अंकल के सामने आपको कुछ नहीं बता सकती। यदि आप मेरा इलाज कर सकते हैं और मेरी तकलीफ के बारे में किसी को कुछ नहीं बतलायें तो मैं आपका बतलाऊं, नहीं तो रहने दो...।’’

लड़की की बात सुनकर मुझे चिन्ता हुई कि लड़की कहीं कोई मुसीबत में तो नहीं है, सो मैंने उसे विश्‍वास दिलाया और अपनी समस्या बताने को कहा, लेकिन जो कुछ उसने बताया, वह एक सदमें से कम नहीं था। विशेषकर इसलिये कि लड़की की शक्ल-ओ-सूरत देखकर कोई सोच भी नहीं सकता कि वह लड़की किसी से ऐसी बात कह सकती है।

लड़की का वजन मुश्किल से 30-35 किलो, लम्बाई करीब पौने पांच फिट, रंग एकदम गौरा, बदन बहुत पतला, नाक-नक्श औसत से अच्छे और दिखने में बेहद कमजोर और कक्षा आठ की छात्रा है। लड़की ने अपनी समस्या के बारे में जो कुछ बतलाया, उसका सार संक्षेप इस प्रकार है-

सर मैं हैल्दी होना चाहती हूँ। मैं 14 साल की हो गयी, लेकिन अभी भी मैं बच्ची जैसी दिखती हूँ, जबकि मेरे साथ पढने वाली दूसरी लड़कियॉं अच्छी-खासी दिखती हैं। आगे से मुझसे कोई बात ही नहीं करता। जब मैं किसी लड़के से बात करती हूँ तो वो मुझे बच्ची समझकर इगनोर-अनदेखा कर देता है और उम्र में मुझसे छोटी और काले रंग की दूसरी हैल्दी लड़कियों में इंट्रेस्ट लेने लगता है।

सर मैं चाहती हूँ कि मेरे स्तन इतने बड़े-बड़े हों जायें कि कोई भी लड़का देखते ही मेरी ओर झट से आकर्षित हो जाये। मैंने उसे कहा कि वह सच में ही अभी बच्ची ही तो है और 14 वर्ष की उम्र में तुम खुद को इतनी बड़ी क्यों समझती हो?

इस पर उसने बताया कि उसके स्कूल की 12 साल से 14 साल तक की तकरीबन सभी लड़कियॉं अपनी-अपनी कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों या अपने पड़ोस के किसी न किसी लड़के से सेक्स करती हैं। सबके अनेक बॉय फ्रेंड हैं। कुछ तो अपने टीचर या किसी रिश्तेदार के साथ ही सेक्स करती हैं। उसने बताया कि उसके भी दो-तीन बॉय फ्रेंड हैं, लेकिन वे उसके बजाय दूसरी लड़कियों में अधिक रुचि लेने लगे हैं। इसलिये वो अच्छी तन्दुरुस्त और ताजा दिखना चाहती है। जिससे कोई भी लड़का देखते ही उसकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रहे। विशेषकर वह चाहती है कि उसके स्तनों का आकार इतना बड़ा हो जाये कि कोई भी लड़का उसे देखते ही लट्टू हो जाये।

मैंने उससे फिर से पूछा कि ऐसा वह क्यों चाहती है। उसने उल्टा मुझसे ही सवाल किया कि जब सारी लड़कियॉं मजे लेती हैं तो मैं ऐसा क्यों नहीं करूँ? उसने बताया कि दो वर्ष पहले उसके साथ सबसे पहले उसके चाचा ने सेक्स किया, जो अब नौकरी पर दूसरे शहर में रहते हैं। ऐसे में उसकी सेक्स करने की तेज इच्छा होती है। पड़ोस के लड़के और साथ पढने वाले लड़के उसे घास नहीं डालते। ऐसे में वह एक 50-55 साल के अपने पास के मकान में रहने वाले किरायेदार के साथ सेक्स करके अपना काम चलाती है।

उसने बताया कि वह अपनी उम्र के लड़कों के साथ सेक्स करने की तमन्ना रखती है, न कि अपने पिता से बड़ी उम्र के मर्दों के साथ, लेकिन उसे अपनी उम्र के लड़के बच्ची समझते हैं। लड़कों की नजर में बड़ी दिखने के लिये वह दो-दो ब्रा पहनती है, लेकिन फिर भी कुछ मतलब नहीं निकलता....!

सारी बात जानकर मैं स्तब्ध रह गया। एक ओर तो देश सेक्स जनित मामलों के विकृततम रूप बलात्कार की विभीषिका से जूझ रहा है, दूसरी ओर हमारे देश की कमशिन-किशारियों की ये मनोदशा है! क्या यह स्थिति हम सबके लिये अत्यधिक चिन्ताजनक नहीं है? इस विषय पर अपने विचार अधिक प्रकट करने के बजाय मैं समाज के इस कड़वे सच को प्रबुद्ध लोगों के सामने रखना अधिक उचित समझता हूँ। जिससे कि हम समाज के इस रूप को भी ध्यान में रखें और इस बारे में समुचित निर्णय ले सकें।

लेखक डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ होम्योपैथ डॉक्टर, संपादक-प्रेसपालिका (पाक्षिक), नेशनल चेयरमैन-जर्नलिस्ट्स, मीडिया एंड रायटर्स वेलफेयर एशोसिएशन और राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) से जुड़े हुए हैं.
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