हत्यारोपी के घर पहुंची पुलिस, गिरफतारी नहीं

Friday, 19 April 2013 0 comments




मुरादाबाद। प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार शात सात बजे कोतवाली पुलिस विवाहिता को जहर देने के आरोपी पति शकील के घर मौजूद है। लेकिन गिरफतारी नहीं की गयी है। सूचना मिलते ही मीडियाकर्मियों ने आरोपी के घर की ओर दौड़ लगा दी है। बताया जा रहा है कि पैसे के दबाव में पुलिस आरोपी को गिरफतार नहीं कर रही है। खैर खुदा के घर देर है अंधेर नहीं, मीडियाकर्मी मौके पर पहुंच कर पुलिस से गिरफतारी के लिए दबाव बनाऐंगे। वहीं कई संगठन भी गिरफतारी न होने पर प्रदर्शन तथा हड़ताल करने का मन बना रहे हैं।
कुछ ही मिनटों में हालात पूरी तरह सामने होंगे। आप अपनी प्रतिक्रया कमेंट के द्वारा अवश्य दें।

निर्भया के साथ हुई दरिंदगी से कम नहीं है यह हैवानियत

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नई दिल्ली ।पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर में रेप के साथ-साथ पाशविक बर्बरता का शिकार हुई 5 साल की बच्ची का मामला देख कर एक बार फिर निर्भया का मामला सबकी आंखों के सामने आ गया। बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर बता रहे हैं कि उन्होंने ऐसी क्रूरता की घटना नहीं देखी थी।

गौरतलब है कि पांच महीने पहले 16 दिसंबर को दिल्ली में निर्भया के साथ गैंग रेप की भयावह घटना ने पूरे देश को उद्वेलित कर दिया था। उस घटना में रेप के साथ ही आरोपियों ने जिस तरह की निर्दयता दिखाई थी, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। उस घटना को 6 महीने भी नहीं हुए हैं और इसी दिल्ली में 5 साल की बच्ची के साथ हुई इस खौफनाक घटना ने एक बार फिर सबको सकते में डाल दिया है।

5 साल की यह मासूम लड़की 14 अप्रैल से गायब थी। उसे उसी बिल्डिंग में ग्राउंड प्लोर में रहने वाले एक युवक ने अपने कमरे में हाथ-पैर बांध कर कैद कर रखा था। उसने बार-बार बच्ची के साथ रेप किया। लगातार पीड़ा से बच्ची बेहोश हो गई थी।
डॉक्टरों के मुताबिक लड़की इस कदर तकलीफ और खौफ से गुजरी है कि वह ठीक से कुछ बता भी नहीं पा रही। उसके पेट के निचले हिस्से से प्लास्टिक की शीशी और मोमबत्ती निकली है। इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी क्रूरता का केस उनके सामने कभी नहीं आया।

उसकी हालत अब भी गंभीर है। डॉक्टर अगले 48 घंटों को उसकी जिन्दगी के लिए बेहद अहम बता रहे हैं।

पुलिस का रवैया भी वैसा ही अमानवीय
निर्भया वाले मामले में पुलिस के रवैये को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। इस मामले में भी पुलिस का रवैया वैसा ही लापरवाही भरा और कई मामलों में तो उस घटना से बदतर रहा। न केवल पुलिस चार दिनों तक बच्ची को खोजने का कोई कारगर प्रयास नहीं कर सकी, बल्कि बाद में जब बच्ची मिल गई और उसके साथ हुई अमानवीय हरकत की सामने आ गई तब भी पुलिस ने कथित तौर पर बच्ची के पिता को 2000 रुपए की रिश्वत देते हुए उनसे कहा कि इस घटना का जिक्र मीडिया से न करें।

घटना को दबाने की इस आपराधिक कोशिश का आरोप भी जैसे कम न था। जब इस घटना के विरोध में आसपास के लोग और आम आदमी के कुछ कार्यकर्ता जुटे और विरोध करने हॉस्पिटल पहुंचे तो वहीं एसीपी स्तर के एक ऑफिसर ने एक युवती को थप्पड़ मार दिया।

हालांकि उस ऑफिसर को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन इस घटना से इतना तो साफ है कि दिल्ली पुलिस ने निर्भया वाले मामले से भी कोई सबक नहीं सीखा है। न चुस्ती-फुर्ती के मामले में और न महिलाओं का सम्मान करने के मामले में। source:NBT

रिश्तेदार को सेक्स करने से रोकेगा एप

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लंदन। किसी हैंडसम जैंटलमैन से बार में मिलना और फिर उसे घर ले आना किसी भी घनी आबादी वाले देश में आम बात हो सकती है, लेकिन मात्र 320000 की आबादी वाले देश आइसलैंड में यह बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। इस कम आबादी वाले देश में ज्यादातर लोग एक दूसरे के रिश्तेदार हैं और हैरत की बात यह है कि अधिकतर लोग इस बात से अनजान रहते हैं। 

इस सॉफ्टवेयर को डिजाइन करने वाले इन तीनों डिजाइनर्स के लिए भी यह खतरा था कि कहीं वे अनजाने में किसी रिश्तेदार से शरीरिक संबंध न बना लें। इससे बचने के लिए डिजाइनर्स ने यह स्मार्टफोन एप तैयार किया है। यह एप इस तरह की नजदीकियों से लोगों को बचाता है और उन्हें एक दूसरे से रिश्ते की जानकारी देता है। 

अर्नर फ्रेयर ऑलस्टेंसन, हेकन प्रेस्तर जॉर्नसन और एलेक्जेंडर एनास हेलगेसन ने सैड इंजिनीयर स्टूडियो में इस एप को तैयार किया है। यह एप दो फोन के एक दूसरे से टकराने पर अलार्म बजाता है। तीनों डिजाइनर्स ने बताया कि इस एप का मकसद है "बम्प इन द एप बिफोर यू बम्प इन द बैड"


डिजाइनर्स ने बताया, "हमने इसमें रिश्तेदारों का जन्मदिन याद रखने के लिए बर्थडे कैलेंडर भी डाला है। यह एप बर्थडे एंट्री के दिन रिमाइंडर भी देता है। इसके अलावा इसमें बम्प नाम का फीचर है जिसके तहत यूजर्स एक दूसरे से अपना फोन टकरा कर यह जान सकते हैं कि उनमें रिश्ता क्या है। 


इन्सेस्ट प्रिवेंशन नाम का फन फीचर यूजर को टैक्स्ट मैसेज और अलार्म के साथ चेतावनी देगा कि वह जिसके करीब जा रहा है वह उसका रिश्तेदार है। गूगल के प्ले स्टोर पर इस एप के लिए एक रिव्यू में लिखा है, "अगर यह एप पहले आया होता तो मैं अनजाने में अपनी ही कजिन के करीब न आता।" 

रेप के खिलाफ प्रोटेस्ट,एसीपी ने मारा चांटा

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने बेशर्मी का एक और नमूना सामने आया है। यहां अस्पताल के बाहर प्रोटेस्ट कर रही युवती को एसीपी अहलावत ने चांटा मार दिया। मौके पर मीडिया की मौजूदगी के कारण एसीपी का यह कारनामा पूरे देश ने देखा, जिसके बाद दोष्ाी एसीपी को सस्पेंड कर दिया गया। एसीपी के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। 

एसीपी के चांटे की शिकार हुई युवती ने बताया कि जिंदगी और मौत के बीच झूल रही बच्ची के परिजनों से मिलने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ए के वालिया अस्पताल पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने उसे रास्ते से हटने के लिए कहा, जब वह नहीं हटी तो एसीपी ने उसे चांटा मार दिया और गालियां दीं। 

दिल्ली में दुष्कर्म के बाद एक नन्ही बच्ची जहां जिंदगी की जंग लड़ रही है, वहीं पुलिस है कि बच्ची के पिता को मुंह बंद करने की कीमत ऑफर करने में व्यस्त है। पांच साल की यह बच्ची आईसीयू में भर्ती है। उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। उसके परिवार का कहना है कि बच्ची का गला रेता गया तथा उसके जननांगों को चोट पहुंचाई गई।

बच्ची के पिता के मुताबिक पुलिस ने उसे मुंह बंद रखने के लिए 2000 रूपए की पेशकश की और यह भी कहा कि वे ईश्वर का धन्यवाद अदा करे कि बच्ची जिंदा बच गई। इसी बीच खबर यह भी है कि पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। बताया जाता है कि यह व्यक्ति मुख्य अभियुक्त का पिता है। 



बच्ची के एक परिजन के अनुसार - जब उन्होंने पुलिस से पूछा इस मामले में वे क्या कर रहे हैं तो उन्होंने बताया कि हमें खुश होना चाहिए कि बच्ची मिल गई है तथा हम उसके जल्द स्वस्थ होने की कामना करें।


इस बच्ची को दो दिन पहले पूर्वी दिल्ली में गांधी नगर स्थित उसके घर से उठा लिया गया था। उसके परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उसकी तलाश शुरू करने में काफी वक्त लगा दिया। 



बच्ची की मां ने न्याय की मांग की है। दो दिन पहले वह खेलने गई थी जहां से उसका अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता ने उसे कमरे में बंद कर दिया और वहीं उसके साथ दुष्कर्म किया। 





वहीं सुबह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के कुछ लोगों का भी अस्पताल के बाहर सुबह पुलिस से झगड़ा हुआ था। इसी बीच बच्ची की हालत को देखते हुए उसे एलएनजेपी अस्पताल में भी शिफ्ट किए जाने पर चर्चा चल रही है। source:patrika

तीन लड़के, तीन घंटे , तीन दिन .....

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तीन लडकियाँ ----------------------------

उम्र पाँच साल -
शाम को घर के बाहर खेल रही थी ...गायब हुयी , तीन दिन बाद ग्राउंड फ्लोर में मिली तो वेजाइना और रेक्टम फटे हुए थे ..आपरेशन के बाद डाक्टर को उसमे तीन मोमबतियां ,और तेल की बोतल डाले जाने का पता चला जिससे उस बच्ची को इंटरनल इन्फेक्शन है…

उम्र सोलह साल -
दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की सुबह साढ़े छह बजे अपने घर से स्कूल जाने के लिए निकली ..घर से कुछ दूरी पर ही तीन लड़कों ने उसे जबरदस्ती गाड़ी में डाल लिया और तीन घंटे तक सामूहिक बलात्कार के बाद वापस उसी के मोहल्ले में डाल गये .....

उम्र बीस साल -
सड़क पर जाती लड़की को तीन लड़के जबरदस्ती गाड़ी में खींच ले गये और सामूहिक बलात्कार के बाद लड़की अर्धबेहोसी की हालत में फ्लाईओवर के नीच पायी गयी ...

एक लड़की खेल रही थी अपने घर के बाहर ...उम्र पाँच साल ,
एक स्कूल जा रही थी ...उम्र सोलह साल ,
एक सड़क पर कहीं जा रही थी ...उम्र बीस साल,
क्या गुनाह था इनका?

आज रामनवमी की छुट्टी है और रामजन्म मनाते हुए मंदिरों में प्रसाद
भी बँटेगा ही ...नौ दिनों से देवियों की पूजा हो रही है ..शक्तिरूपा ..चंडी 
काली ..दुर्गा ...कहाँ है ? शक्ति .. खड्ग और शेर इत्यादि ?

(पिछले तीन दिन से हुयी ये सभी घटनाएँ दिल्ली में घटी हैं )

क्या लड़के की संवेदना में सेक्स गालियों और गलियों/सड़क की विकृति से शामिल होता है और लड़की की संवेदना में डर के साथ ..??? 

देख रहीं हूँ अपनी बालकनी से नीचे सड़क पर एक सात साल की बच्ची अपने फरोक के घेर को घुमा घुमा कर नाच रही है और साथ में उसका तीन साल का भाई भी नाच रहा है ...इसी नाच की आंच में झुलस रही हैं मेरी आँख कि जल उठे मेरी हर साँस ......

लड़की तुम इसी तरह नाचती रहना अपने भाई के साथ ...बिना डरे ..
माँ तुम डरना नहीं .....

खालिद हसन के फेसबुक वाल से साभार  ....

हत्यारोपी परिवार के चरित्र पर लगा है सवालिया निशान...

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यह रहा जुनैद का फोटो जो उसके फेसबुक एकाउंट से साभार है।

-आरोपी का भतीजा भी छेड़छाड़ में जेल जाते बाल-बाल बचा था
-काफी मिन्नतों के बाद बचा था हारून के बेटा जुनैद


मुरादाबाद। पवन कुमार

जहर दे कर विवाहिता को मौत की नींद सुलाने वाले ठाकुरद्वारा निवासी परिवार के एक और सदस्य के चरित्र पर सवालिया निशान लग गया है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि पूरा परिवार पैसे की चकाचैंध में अंधा बन चुका है।
बीते सप्ताह ठाकुरद्वारा निवासी शकील व उसके भाई हारून, बहन सलमा आदि ने शकील की पत्नी महशर जहां को जहर देकर मौत की नहीं सुला दिया था। अब शकील के भतीजे जुनैद पुत्र हाजी हारून के चरित्र पर भी उंगली उठायी गयी है। सूत्रों के अनुसार  जुनैद कुछ माह पूर्व एक युवती से छेड़छाड़ के मामले में युवती की पिता की शिकायत पर कोतवाली तक पहुंच गया था। जिसपर हारून के मगरमच्छी आसूओं व माफी मांगने पर युवती के पिता ने कार्रवाई नहीं कराई थी। जिससे जुनैद जेल जाने से बच गया था। वर्ना केन्द्र सरकार की नियम कायदों के अनुसार तो बड़े बाप की बिगड़ी औलाद अब तक जेल की हवा खा रही होती। जुनैद के चाचा शकील के अवैध संबधों का खुलासा होते ही लोगों को जुनैद के इस मामले की भी कानाफूसी करते देखा गया।

बाहरवाली के चक्कर में घरवाली को दिया जहर

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-ठाकुरद्वारा में हुई शर्मसार घटना
-कांठ में मृतका के भाई ने डीआईजी से लगाई रिपोर्ट की गुहार
-हत्या में शामिल था पूरा परिवार


मुरादाबाद। रफ़्तार 24 न्यूज़ 

बीते सप्ताह जनपद के ठाकुरद्वारा शहर में विवाहिता को जहर देकर मौत की नींद सुला दिया गया। हत्या में पूरा परिवार शामिल था। अपना बचाव करते हुए मृतका के परिजन गोल-मोल जवाब देते रहे। हत्या का कारण पति की प्रेमिका को बताया जा रहा है। गुरूवार को मृतका के भाई ने कांठ में डीआईजी से रिपोर्ट की गुहार लगायी है।
घटना 11 अप्रैल की है। कांठ निवासी महशर जहां का निकाह करीब 15 वर्ष पूर्व ठाकुरद्वारा के मुहल्ला अंसारियान निवासी शकील पुत्र स्व. हाजी फारूक के साथ हुआ था। शादी के बाद दंपती को 4 बच्चे भी पैदा हुए थे। इसके बावजूद शकील व उसका भाई हारून, बहन सलमा आदि महशर जहां को आए दिन प्रताडि़त करते थे। कई बार उसे घर से निकालने का प्रयास किया गया था। घर के भीतर भी पूरा परिवार अपना वहशीपन का परिचय देते हुए महशर जहां के साथ मारपीट करता था।
गुरूवार 11 अप्रैल को शकील अहमद, हारून, सलमा आदि ने मिलकर महशर जहां को जहर देकर मौत की नींद सुला दिया और सबके सामने मगरमच्छ के आंसू रोकर ढोंग करना शुरू कर दिया। इस दौरान मौत की सूचना मृतका के मायके वालों को लगी तो वे ठाकुरद्वारा पहुंच गए। उन्होंने पोस्टमार्टम कराने की बात कही तो शकील, हारून आदि के पांव तले जमीन खिसक गयी। उन्हें अपने गले पर फंदा साफ दिखाई देने लगा। वे लोग मृतका के मायके वालों से भिड़ गए तथा पोस्टमार्टम कराने से इंकार करने लगे। परन्तु मायके वालों ने उनकी एक न सुनी और शव लेकर काशीपुर की ओर दौड़ लगा दी। जहां मृतका के भाइयों के सब्र का बांध टूट गया। किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में झड़प हो गयी। शकील ने वहां से भाग कर जान बचायी। परन्तु मृतका के भाइयों का गुस्सा आरोपी पक्ष के वाहनों पर उतरा। उन्होंने वाहनों को तोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया।
अगले दिन शुक्रवार 12 अप्रैल को मृतका का शव ठाकुरद्वारा पहुंचा। जहां उसके नमाज ए जनाजा में मृतका के पति शकील के पहुंच जाने पर मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया। जहां मुहल्ले वालों के हस्तक्षेप पर शकील अहमद बच कर नौ दो ग्यारह हो गया। जिसके बाद मृतका को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। पूरे शहर में मामला चर्चा का विषय बना रहा। शकील के भाईयों ने समझौता होने की झूठी अफवाह उड़ा दी। जिसे मृतका के भाइयों अबरार आदि ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सच सामने लाया जाएगा तथा आरोपियों को जेल  भेजा जाएगा। मृतका के भाई ठाकुरद्वारा कोतवाली पहुंचे तो कोतवाल ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
गुरूवार 18 अप्रैल को मृतका के भाई अबरार अहमद ने कांठ में डीआईजी को मामले से अवगत कराते हुए। आरोपियों को गिरफतार करने की मांग की है।


अगवानपुर की युवती के प्यार में अंधा है शकीलः

कांठ। हत्या का कारण अगवानपुर निवासी एक युवती को बताया जा रहा है। जिसके इश्क में पागल होकर शकील ने अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। वहशीपनें की हदें तब पार हो गयीं जब उसके इस कृत्य में पूरे परिवार ने उसका साथ दिया।

बच्चों का भविष्य पड़ा खतरे मेंः

मुरादाबाद। जिस परिवार ने 15 वर्षों से परिवार की सेवा कर रही महशर जहां को नहीं बख्शा वे उसके बच्चों को किस तरह की जिंदगी दे पाऐंगे
यह सवाल मृतका के मायके वाले ही नहीं ठाकुरद्वारा शहर के हर बाशिंदे के मन में डोल रहा है। वहशीपने पर उतरे हाजी हारून के परिवार ने विवाहिता को बेरहमी के साथ मौत की नींद सुला दिया तब उन्हें उसके चार मासूम बच्चों की जरा भी फिक्र नहीं हुई। वे बच्चे अब भी उसी वहशी परिवार में पल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बच्चों ने भी यह बात स्वीकार की है कि उनकी मां को उनके बाप शकील, ताउ हारून आदि ने जहर देकर मौत की नींद सुलाया है। ऐसे में बच्चों को ऐसे परिवार के हाथों में छोड़ना कितना उचित है

पैसे के बल पर हारून कर रहा है मामले को दबाने की कोशिशः

अगर मृतका के मायके वाले आर्थिक रूप से कमजोर होते तो मामले को अब तक दफन किया जा चुका होता। बताया जा रहा है कि शकील का भाई हारून पैसे के बल पर मामले को पूरी तरह दबाने की कोशिश कर रहा है। कई लोगों ने तो यहां तक बताया कि इस हत्या का मुख्य आरोपी शकील नहीं उसका भाई हारून है। सच क्या है यह तो जल्द ही सामने होगा। पर सवाल यह खड़ा होता है कि ऐसे खूनी परिवार को समाज में रखना कितना हानिकारक है। 

रफ़्तार 24 न्यूज़