रेप के खिलाफ प्रोटेस्ट,एसीपी ने मारा चांटा

Friday, 19 April 2013 0 comments


 

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने बेशर्मी का एक और नमूना सामने आया है। यहां अस्पताल के बाहर प्रोटेस्ट कर रही युवती को एसीपी अहलावत ने चांटा मार दिया। मौके पर मीडिया की मौजूदगी के कारण एसीपी का यह कारनामा पूरे देश ने देखा, जिसके बाद दोष्ाी एसीपी को सस्पेंड कर दिया गया। एसीपी के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। 

एसीपी के चांटे की शिकार हुई युवती ने बताया कि जिंदगी और मौत के बीच झूल रही बच्ची के परिजनों से मिलने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ए के वालिया अस्पताल पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने उसे रास्ते से हटने के लिए कहा, जब वह नहीं हटी तो एसीपी ने उसे चांटा मार दिया और गालियां दीं। 

दिल्ली में दुष्कर्म के बाद एक नन्ही बच्ची जहां जिंदगी की जंग लड़ रही है, वहीं पुलिस है कि बच्ची के पिता को मुंह बंद करने की कीमत ऑफर करने में व्यस्त है। पांच साल की यह बच्ची आईसीयू में भर्ती है। उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। उसके परिवार का कहना है कि बच्ची का गला रेता गया तथा उसके जननांगों को चोट पहुंचाई गई।

बच्ची के पिता के मुताबिक पुलिस ने उसे मुंह बंद रखने के लिए 2000 रूपए की पेशकश की और यह भी कहा कि वे ईश्वर का धन्यवाद अदा करे कि बच्ची जिंदा बच गई। इसी बीच खबर यह भी है कि पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। बताया जाता है कि यह व्यक्ति मुख्य अभियुक्त का पिता है। 



बच्ची के एक परिजन के अनुसार - जब उन्होंने पुलिस से पूछा इस मामले में वे क्या कर रहे हैं तो उन्होंने बताया कि हमें खुश होना चाहिए कि बच्ची मिल गई है तथा हम उसके जल्द स्वस्थ होने की कामना करें।


इस बच्ची को दो दिन पहले पूर्वी दिल्ली में गांधी नगर स्थित उसके घर से उठा लिया गया था। उसके परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उसकी तलाश शुरू करने में काफी वक्त लगा दिया। 



बच्ची की मां ने न्याय की मांग की है। दो दिन पहले वह खेलने गई थी जहां से उसका अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता ने उसे कमरे में बंद कर दिया और वहीं उसके साथ दुष्कर्म किया। 





वहीं सुबह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के कुछ लोगों का भी अस्पताल के बाहर सुबह पुलिस से झगड़ा हुआ था। इसी बीच बच्ची की हालत को देखते हुए उसे एलएनजेपी अस्पताल में भी शिफ्ट किए जाने पर चर्चा चल रही है। source:patrika

तीन लड़के, तीन घंटे , तीन दिन .....

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तीन लडकियाँ ----------------------------

उम्र पाँच साल -
शाम को घर के बाहर खेल रही थी ...गायब हुयी , तीन दिन बाद ग्राउंड फ्लोर में मिली तो वेजाइना और रेक्टम फटे हुए थे ..आपरेशन के बाद डाक्टर को उसमे तीन मोमबतियां ,और तेल की बोतल डाले जाने का पता चला जिससे उस बच्ची को इंटरनल इन्फेक्शन है…

उम्र सोलह साल -
दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की सुबह साढ़े छह बजे अपने घर से स्कूल जाने के लिए निकली ..घर से कुछ दूरी पर ही तीन लड़कों ने उसे जबरदस्ती गाड़ी में डाल लिया और तीन घंटे तक सामूहिक बलात्कार के बाद वापस उसी के मोहल्ले में डाल गये .....

उम्र बीस साल -
सड़क पर जाती लड़की को तीन लड़के जबरदस्ती गाड़ी में खींच ले गये और सामूहिक बलात्कार के बाद लड़की अर्धबेहोसी की हालत में फ्लाईओवर के नीच पायी गयी ...

एक लड़की खेल रही थी अपने घर के बाहर ...उम्र पाँच साल ,
एक स्कूल जा रही थी ...उम्र सोलह साल ,
एक सड़क पर कहीं जा रही थी ...उम्र बीस साल,
क्या गुनाह था इनका?

आज रामनवमी की छुट्टी है और रामजन्म मनाते हुए मंदिरों में प्रसाद
भी बँटेगा ही ...नौ दिनों से देवियों की पूजा हो रही है ..शक्तिरूपा ..चंडी 
काली ..दुर्गा ...कहाँ है ? शक्ति .. खड्ग और शेर इत्यादि ?

(पिछले तीन दिन से हुयी ये सभी घटनाएँ दिल्ली में घटी हैं )

क्या लड़के की संवेदना में सेक्स गालियों और गलियों/सड़क की विकृति से शामिल होता है और लड़की की संवेदना में डर के साथ ..??? 

देख रहीं हूँ अपनी बालकनी से नीचे सड़क पर एक सात साल की बच्ची अपने फरोक के घेर को घुमा घुमा कर नाच रही है और साथ में उसका तीन साल का भाई भी नाच रहा है ...इसी नाच की आंच में झुलस रही हैं मेरी आँख कि जल उठे मेरी हर साँस ......

लड़की तुम इसी तरह नाचती रहना अपने भाई के साथ ...बिना डरे ..
माँ तुम डरना नहीं .....

खालिद हसन के फेसबुक वाल से साभार  ....

हत्यारोपी परिवार के चरित्र पर लगा है सवालिया निशान...

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यह रहा जुनैद का फोटो जो उसके फेसबुक एकाउंट से साभार है।

-आरोपी का भतीजा भी छेड़छाड़ में जेल जाते बाल-बाल बचा था
-काफी मिन्नतों के बाद बचा था हारून के बेटा जुनैद


मुरादाबाद। पवन कुमार

जहर दे कर विवाहिता को मौत की नींद सुलाने वाले ठाकुरद्वारा निवासी परिवार के एक और सदस्य के चरित्र पर सवालिया निशान लग गया है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि पूरा परिवार पैसे की चकाचैंध में अंधा बन चुका है।
बीते सप्ताह ठाकुरद्वारा निवासी शकील व उसके भाई हारून, बहन सलमा आदि ने शकील की पत्नी महशर जहां को जहर देकर मौत की नहीं सुला दिया था। अब शकील के भतीजे जुनैद पुत्र हाजी हारून के चरित्र पर भी उंगली उठायी गयी है। सूत्रों के अनुसार  जुनैद कुछ माह पूर्व एक युवती से छेड़छाड़ के मामले में युवती की पिता की शिकायत पर कोतवाली तक पहुंच गया था। जिसपर हारून के मगरमच्छी आसूओं व माफी मांगने पर युवती के पिता ने कार्रवाई नहीं कराई थी। जिससे जुनैद जेल जाने से बच गया था। वर्ना केन्द्र सरकार की नियम कायदों के अनुसार तो बड़े बाप की बिगड़ी औलाद अब तक जेल की हवा खा रही होती। जुनैद के चाचा शकील के अवैध संबधों का खुलासा होते ही लोगों को जुनैद के इस मामले की भी कानाफूसी करते देखा गया।

बाहरवाली के चक्कर में घरवाली को दिया जहर

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-ठाकुरद्वारा में हुई शर्मसार घटना
-कांठ में मृतका के भाई ने डीआईजी से लगाई रिपोर्ट की गुहार
-हत्या में शामिल था पूरा परिवार


मुरादाबाद। रफ़्तार 24 न्यूज़ 

बीते सप्ताह जनपद के ठाकुरद्वारा शहर में विवाहिता को जहर देकर मौत की नींद सुला दिया गया। हत्या में पूरा परिवार शामिल था। अपना बचाव करते हुए मृतका के परिजन गोल-मोल जवाब देते रहे। हत्या का कारण पति की प्रेमिका को बताया जा रहा है। गुरूवार को मृतका के भाई ने कांठ में डीआईजी से रिपोर्ट की गुहार लगायी है।
घटना 11 अप्रैल की है। कांठ निवासी महशर जहां का निकाह करीब 15 वर्ष पूर्व ठाकुरद्वारा के मुहल्ला अंसारियान निवासी शकील पुत्र स्व. हाजी फारूक के साथ हुआ था। शादी के बाद दंपती को 4 बच्चे भी पैदा हुए थे। इसके बावजूद शकील व उसका भाई हारून, बहन सलमा आदि महशर जहां को आए दिन प्रताडि़त करते थे। कई बार उसे घर से निकालने का प्रयास किया गया था। घर के भीतर भी पूरा परिवार अपना वहशीपन का परिचय देते हुए महशर जहां के साथ मारपीट करता था।
गुरूवार 11 अप्रैल को शकील अहमद, हारून, सलमा आदि ने मिलकर महशर जहां को जहर देकर मौत की नींद सुला दिया और सबके सामने मगरमच्छ के आंसू रोकर ढोंग करना शुरू कर दिया। इस दौरान मौत की सूचना मृतका के मायके वालों को लगी तो वे ठाकुरद्वारा पहुंच गए। उन्होंने पोस्टमार्टम कराने की बात कही तो शकील, हारून आदि के पांव तले जमीन खिसक गयी। उन्हें अपने गले पर फंदा साफ दिखाई देने लगा। वे लोग मृतका के मायके वालों से भिड़ गए तथा पोस्टमार्टम कराने से इंकार करने लगे। परन्तु मायके वालों ने उनकी एक न सुनी और शव लेकर काशीपुर की ओर दौड़ लगा दी। जहां मृतका के भाइयों के सब्र का बांध टूट गया। किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में झड़प हो गयी। शकील ने वहां से भाग कर जान बचायी। परन्तु मृतका के भाइयों का गुस्सा आरोपी पक्ष के वाहनों पर उतरा। उन्होंने वाहनों को तोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया।
अगले दिन शुक्रवार 12 अप्रैल को मृतका का शव ठाकुरद्वारा पहुंचा। जहां उसके नमाज ए जनाजा में मृतका के पति शकील के पहुंच जाने पर मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया। जहां मुहल्ले वालों के हस्तक्षेप पर शकील अहमद बच कर नौ दो ग्यारह हो गया। जिसके बाद मृतका को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। पूरे शहर में मामला चर्चा का विषय बना रहा। शकील के भाईयों ने समझौता होने की झूठी अफवाह उड़ा दी। जिसे मृतका के भाइयों अबरार आदि ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सच सामने लाया जाएगा तथा आरोपियों को जेल  भेजा जाएगा। मृतका के भाई ठाकुरद्वारा कोतवाली पहुंचे तो कोतवाल ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
गुरूवार 18 अप्रैल को मृतका के भाई अबरार अहमद ने कांठ में डीआईजी को मामले से अवगत कराते हुए। आरोपियों को गिरफतार करने की मांग की है।


अगवानपुर की युवती के प्यार में अंधा है शकीलः

कांठ। हत्या का कारण अगवानपुर निवासी एक युवती को बताया जा रहा है। जिसके इश्क में पागल होकर शकील ने अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। वहशीपनें की हदें तब पार हो गयीं जब उसके इस कृत्य में पूरे परिवार ने उसका साथ दिया।

बच्चों का भविष्य पड़ा खतरे मेंः

मुरादाबाद। जिस परिवार ने 15 वर्षों से परिवार की सेवा कर रही महशर जहां को नहीं बख्शा वे उसके बच्चों को किस तरह की जिंदगी दे पाऐंगे
यह सवाल मृतका के मायके वाले ही नहीं ठाकुरद्वारा शहर के हर बाशिंदे के मन में डोल रहा है। वहशीपने पर उतरे हाजी हारून के परिवार ने विवाहिता को बेरहमी के साथ मौत की नींद सुला दिया तब उन्हें उसके चार मासूम बच्चों की जरा भी फिक्र नहीं हुई। वे बच्चे अब भी उसी वहशी परिवार में पल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बच्चों ने भी यह बात स्वीकार की है कि उनकी मां को उनके बाप शकील, ताउ हारून आदि ने जहर देकर मौत की नींद सुलाया है। ऐसे में बच्चों को ऐसे परिवार के हाथों में छोड़ना कितना उचित है

पैसे के बल पर हारून कर रहा है मामले को दबाने की कोशिशः

अगर मृतका के मायके वाले आर्थिक रूप से कमजोर होते तो मामले को अब तक दफन किया जा चुका होता। बताया जा रहा है कि शकील का भाई हारून पैसे के बल पर मामले को पूरी तरह दबाने की कोशिश कर रहा है। कई लोगों ने तो यहां तक बताया कि इस हत्या का मुख्य आरोपी शकील नहीं उसका भाई हारून है। सच क्या है यह तो जल्द ही सामने होगा। पर सवाल यह खड़ा होता है कि ऐसे खूनी परिवार को समाज में रखना कितना हानिकारक है। 

इंडिया ही नहीं यूएस और चाइना मे भी हैं रफ़्तार 24 न्यूज़ न्यूज के पाठक

Thursday, 18 April 2013 0 comments


रफ़्तार 24 न्यूज़  । इंटरनेट डेस्क


बीते वर्ष शुरू हुआ हिन्दी न्यूज पोर्टल रफ़्तार24न्यूज़.कॉम   इंडिया के साथ-साथ यूएस, चाइना, रशिआ, सउदी अरब आदि देशों में भी जमकर पढ़ा जा रहा है। हालांकि बीते दो माह में कम समाचार प्रकाशित होने के कारण पाठकों की संख्या में कुछ कमी आयी, लेकिन रफतार 24 न्यूज की टीम एक बार फिर से जुट गयी है।

ताजा सर्वेक्षण के अनुसार रफ़्तार 24 न्यूज़ के पाठकों की संख्या

भारत: 4644
यूएसः 1769
चाइना: 387
रशिआ: 125
जर्मनी: 114
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अपने समाचार व लेख raftar24news@gmail.com  पर ईमेल करें, हमें प्रकाशित करने में बेहद खुशी होगी।

तुम्हारे इस अमल से इस्लाम की तौहीन होती है

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पिछले दो चार सालों से मीडिया में बार ये खबर  आ रही हैं कि पाकिस्तान  में अल्पसंख्यकों के साथ  दौगला व्यवहार किया जा रहा है. अमर उजाला में 15.4.2013 को प्रकाशित फोकस पृष्ठ पर सुभाष कश्यप, विवेक गोयल, और कमल खत्री जैसे बुद्धीजीवी लोगों ने इस मुद्दे पर महत्वपूरण लेख लिखे हैं. उन्होंने पाकिस्तान से आये लोगों की पीड़ा को महसूस किया, और अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुऐ अपनी कलम चलायी है. विवेक गोयल ने कई लोगों की दास्तानें सुनाईं हैं.
एक पांच साल की बच्ची दिव्या से बातचीत का उल्लेख उन्होंने कुछ इस तरह किया है. यहां क्यों आई हो ? दिव्या कहती है क्योंकि यहां अच्छा है. ये कौनसी जगह है ? दिव्या - इंडिया है. यहां रहकर क्या करोगी ? दिव्या – पढ़ूंगी. वहां क्यों नहीं पढ़ती ? दिव्या – वहां पर स्कूल में कलमा पढ़ाया जाता है. कलमा पढ़ने से क्या होता है ? दिव्या – कलमा पढ़ूंगी तो मुसलमान हो जाऊंगी। एक पांचवर्षीय बच्ची के इस तरह से बात करने से साफ जाहिर हो रहा है कि उनकी घरेलू शिक्षा ने उनकी मानसिकता को गुलाम बना दिया है।
जाहिर ये बातें पांच वर्षीय दिव्या को किसी स्कूली टीचर ने तो सिखाई ही नहीं होंगी दरअस्ल इस तरह की बातें उसे घर पर सिखाई गईं। और अब इन्हीं बातों से मीडिया को इमोशनली बलैक मेल किया जा रहा है। जिस देश के ये नागरिक हैं वह एसा देश है जहां पर अल्पसंख्यक ही नहीं बहुसंख्य भी खतरे में हैं खुद वह देश बारूद के ढ़ेर पर बैठा अपनी तबाही का इंताजार कर रहा है वहां पर इस तरह की घटनाएं हर खास ओ आम के साथ होती हैं।

जिस दिव्या ने स्कूल ना जाने की वजह  कलिमा बताया है उस बच्ची  की मानसिकता को अभी से ही गुलाम बनाने वाले उसके अभिभावक शायद भूल गये  कि जिस तरह पाकिस्तान में स्कूलों में इस्लामी कलमा पढ़ाया जाता है उसी तरह भारत में भी स्कूलों में हिंदू धर्म का कलिमा पढ़ाया जाता है जो इस तरह है ॐ भूर्भव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। ये मंत्र प्रारथमिक विद्यालयों में हर रोज प्रार्थना के दौरान पढ़ाया जाता है।
लेकिन कभी किसी मुसलमान ने पाकिस्तान सरकार से ये शिकायत नहीं की कि वे स्कूल इसलिये नहीं जाते कि वहां पर हिंदू धर्म का कलिमा पढ़ाया जाता है. राम को लक्ष्मण को , दशरथ को, रामायण को महाभारत को यहां के पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया है उसके पढ़ने पर तो किसी ने आपत्ती नहीं जताई. फिर इस तरह का हौवा क्यों खड़ा किया जा रहा है. भारत के अल्पसंख्यकों को जो भी समस्याएं होती हैं उन्हें वे भारत सरकार से कहते हैं ना कि पाकिस्तान की सरकार से फिर पाकिस्तान से आये ये लोग भारत से क्यों गुहार लगा रहे हैं.
पाकिस्तान सरकार से कहें वहां प्रदर्शन करें अपनी आजादी के लिये अपने अधिकारों के लिये. यहां इस तरह की बातें करके यहां की सांप्रदायकि ताकतों को क्यों काद पानी दिया जा रहा है ? अगर उनके साथ में जबरन धर्म परिवर्तन करने जैसी घटनायें हुई हैं तो ये गैर इस्लामी है. इस्लाम का तो अर्थ ही शान्ति है उसमें बलात धर्म परिवर्तन के लिये कोई जगह नहीं है। वह तो यहां तक कह देता है कि धर्म के बारे में कोई जोर जबरदस्ती मत करो उनका धर्म उनके लिये तुम्हारा धर्म तुम्हारे लिये।
इसके बाद भी इस्लाम दोषी. इसके बाद भी तरह तरह के भद्दे आरोप शान्ति के धर्म पर क्यों लगाये जा रहे हैं ? जिस देश के सरकार के सामने आकर ये अपनी समस्याओं का रोना रो रहे हैं उस देश में भी लोगों पर जुल्म होता है. 1947 के दंगों से लेकर आज तक दंगों के जख्म हरे हैं दलितों पर आज भी अत्याचार हो रहे हैं. मगर क्या इन शोषित लोगों ने किसी विदेशी सरकार से ये अपील की कि वह उसका समाधान करे. पाकिस्तान से आये लोग ये क्यों भूल गये कि भारत उनका शत्रू देश है. और उसके गुणगान करना उन्हें गद्दार बना सकता है जैसा यहां पर होता है. अगर कोई मुस्लिम पाकिस्तान का नाम भी अपनी जुबान पर लेआता है तो उसे यहां के तथाकथित देशभक्त गद्दारी के तमगे से नवाज देते हैं।
तो क्या ये अपने देश के गद्दार नहीं हुऐ. और जिस मीडिया का कलेजा इनके लिये फटा जा रहा है, और जो बुद्धीजी इनको भारत की नागरिकता दिलाने के लिये एडीचोटी का जोर लगा रहे हैं उन्होंने पिछले वर्ष उस 80 पाकिस्तानी को भारत की नागरिकता दिलाने के लिये क्यों जुबान नहीं चलाई जिसका पूरा परिवार भारत में है और वह अकेला पाकिस्तान में जो जिंदगी के आखरी पड़ाव में बस यह चाहता था कि वह अपने परिवार के बीच आखरी सांस लेना चाहता है ना कि पाकिस्तान में. उसके लिये इन्होंने आवाज क्यों नहीं उठाई ? क्या केवल इसलिये कि उसका धर्म दूसरा था ?
खैर जो भी हो ........ पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ बहुसंख्यक समुदाय असुरक्षा और भय के माहौल में जी रहा है जिसका इलाज पाक सरकार के पास है ना कि भारत के पास। और जो लोग जबरन शादी, बलात धर्म, लूट पाट, हत्या आदी कर रहे हैं वह निंदनीय है और उसका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है. लेकिन इस्लाम का नाम लेकर ये लोग उसकी छवी को बट्टा लगा रहे हैं। इससे किसी और की नहीं बल्कि खुद इस्लाम की तौहीन हो रही है. अल्लाम इकबाल ने कहा था कि

खुदा के बंदे तो हैं हजारों वनों में फिरते हैं मारे मारे
मगर मैं उसका बंदा बनुंगा जिसे खुदा के बंदों से प्यार होगा।
लेखक वसीम अकरम त्यागी युवा पत्रकार और एक्टिविस्ट हैं.
source:B4M

सड़क पर पत्थर से लिखा 'रेप हुआ है'

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नई दिल्ली।। आज सुबह साउथ दिल्ली के नानकपुरा गुरुद्वारे के पास फुटओवर ब्रिज के नीचे एक नेपाली युवती बदहवास हालत में पड़ी मिली। जिस्म पर अस्त-व्यस्त और थोड़े कपड़े। कई जगह चोट के निशान। करीब 20 साल की इस युवती को यूं पड़ा देख वहां राहगीरों का मजमा इकठ्ठा हो गया। लोगों ने पूछा तो युवती ने एक ईंट का टुकड़ा उठा कर सड़क पर लिखकर बताया कि उसके साथ 3 लोगों ने रेप किया है।

किसी ने पुलिस को कॉल करके इस सनसनीखेज मामले की सूचना दी। फौरन साउथ दिल्ली के कई सीनियर अफसर समेत लोकल पुलिस पहुंची। युवती ने बताया कि किडनैप करके उसके साथ गैंगरेप किया गया है। तुरंत युवती को अस्पताल ले जाया गया।

खबर लिखे जाने तक युवती पूरी तरह होशो-हवास में नहीं थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस के कई आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी थी। एक सीनियर पुलिस अफसर ने बताया कि आज सुबह तकरीबन साढ़े सात बजे पुलिस को कॉल मिली। नेपाली लड़की यहां कोटला मुबारकपुर इलाके में किराए पर रहती है। युवती का आरोप है कि उसे किडनैप करके रात में 3 लड़कों ने गैंगरेप किया है।

लड़की की हालत देखकर आशंका है कि वारदात से पहले उसे बहुत ज्यादा नशीला पदार्थ दिया गया। वह पूरी तरह सुध में नहीं है। वहीं, जिस सुनसान जगह पर लड़की अस्त-व्यस्त हालत में पड़ी थी, वहां से गुजर रहे राहगीरों ने देखा तो पब्लिक इकठ्ठी हो गई। कुछ चश्मदीदों के मुताबिक जब लोगों ने उसे हिला- डुलाकर पूछा तो कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी। नेपाली लड़की ने एक ईंट का टुकड़ा उठाकर सड़क पर लिखकर बताया कि उसके साथ रेप हुआ है।

पुलिस अफसर के मुताबिक लोकल थाना पुलिस ने कुछ लड़कों को संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। लड़की को मेडिकल के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लड़की के होश में आने और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले का पता चल सकेगा। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है।

source:NBT

रफ़्तार 24 न्यूज़