क्या यही प्यार है? एक प्रेमी दो प्रेमिका....

Friday, 2 November 2012 0 comments

मुरादाबाद। जनपद के ठाकुरद्वारा का यह दूसरा मामला है जब दो प्रेमिकाऐं एक प्रेमी के लिए भिड़ गई। क्षेत्रीय जनता बाहर से आकर पढ़ रहे छात्रों को ही दोषी मान रही है। इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो बेहद घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। रंगरेलिया मनाने, प्रेमी प्रेमिकाओं के पकड़े जाने की बातें यहां आम हो चुकी हैं।
बुधवार को ठाकुरद्वारा के काशीपुर रोड पर शार्ट हैंड सेन्टर पर पढ़ने वाली दो छात्राऐं आपस में भिड़ गईं। हाथापाई के साथ जमकर गालीगलौज हुई। दोनों एक दूसरे पर उसके प्रेमी से सम्बंध बनाने का आरोप लगाकर एक घंटे तक भिड़ती रहीं। बताते हैं कि एक युवक दोनों छात्राओं से प्रेम का ढोंग कर रहा था। इस बात की जानकारी होने पर दोनों छात्राऐं आपस में भिड़ गईं।

इस तरह का दूसरा मामला, गंभीरता से लेना जरूरीः
यह पहला मामला नहीं है। दो माह पहले भी कुछ ऐसा ही दृश्य मेन मार्केट में देखने को मिला था। दो छात्राऐं एक प्रेमी के लिए भिड़ गईं थी। तब भी घंटा भर चली नोटंकी में हाथापाई और गालीगलौज हुआ था। 
इसे गंभीरता से लेना बेहद आवश्यक हो गया है। प्रशासन कुछ जरूरी कदम उठाकर इस पर लगाम कस सकता है।

शार्ट हैंड सेन्टर पर सिखाया जाता है प्यार का पाठः
नगर में चल रहे शार्ट हैंड सेन्टर इन सब बातों को बढ़ावा दे रहे हैं। दर्जनों सेंटर बगैर मान्यता के चल रहे हैं। लड़के और लड़कियों की क्लासें एक साथ चलायी जाती हैं। जिससे तमाम छात्र छात्राऐं पढ़ाई छोड़ प्यार की पींगे बढ़ाने लगते हैं। बीते समय में दर्जनों प्रेमी युगल फरार हुए जिनमें सबसे ज्यादा शार्ट हैंड सेन्टर पर पढ़ने वाले छात्र छात्राऐं थे। 
सेन्टर संचालक मात्र पैसे की हवस में इन सबकों बढ़ावा दे रहे हैं। प्रत्येक छात्र छात्रा से 400 रूपये से 500 रूपये प्रति माह लिए जाते हैं। जिसमें संचालक चाहें तो अलग अलग क्लास लगा सकते हैं। मगर उन्हें इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ता।

सेन्टरों में नहीं है कोई आधुनिक सुविधाः
छोटे से छोटे सेन्टर की भी बात करें तो एक क्लास में 200 से 250 विद्यार्थियों को ठूस दिया जाता है। हर सेन्टर पर कम से कम 3 क्लासेज चलती हैं। मतलब कुल 700-800 छात्र छात्राऐं। 800 छात्रों से मिलने वाला पैसा 400 रूपये प्रति छात्र के हिसाब से भी 320000 तीन लाख बीस हजार रूपये प्रति माह मिलता है। एडमिशन फीस के रूप में तो 500 से 1400 रूपये लिए ही जाते है।
अब सुविधाओं पर नजर डालें तो लगभग हर सेंटर का यही हाल है। टीन शेड में पढ़ाई चल रही है। पंखों की कोई सुविधा नहीं है। लड़के लड़कियों को एक ही कमरे में मुर्गी के बच्चों की तरह ठूस दिया जाता है। कुल मिलाकर सुविधा के मामले में लगभग सभी सेन्टर शून्य हैं।

कहां जाता है इतना पैसा?
सेन्टर संचालक लगभग तीन लाख रूपये से अधिक प्रतिमाह कमाते हैं। कहां करते हैं खर्च? मान्यता नहीं है तो कोई टैक्स नहीं भरते। पंखे नहीं हैं तो बिजली का कोई बिल नहीं। शिक्षकों को प्रतिमाह 1500 से  2000 रूपये वेतन दिया जाता है। सिर्फ तीन ही शिक्षक पढ़ातें हैं, मतलब ज्यादा से ज्यादा 6000 रूपये प्रतिमाह खर्च और लाखों की कमाई। प्रशासन इस ओर आखें मूंदे हुए है। उपजिलाधिकारी द्वारा रजिस्टेशन कराने का आदेश हुआ था जिसे सेन्टर संचालकों ने हवा में उड़ा दिया।

"रेप करने वालों के हाथ पैर तोड़ दो"

Thursday, 1 November 2012 0 comments


 

रेवाड़ी। एनडीए संयोजक और जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव लोगों को कानून हाथ में लेने के लिए उकसा रहे हैं। हरियाणा के रेवाड़ी में राष्ट्रीय लोकदल की ओर से आयोजित रैली में यादव ने कहा कि जो दलित लड़कियों से रेप और यौन शोषण की कोशिश करें खाप पंचायतों को उनके हाथ पैर तोड़ देने चाहिए। 

यादव ने कहा कि खाप पंचायतें महिलाओं की सुरक्षा करने में नाकाम रही है। रेप की घटनाएं बढ़ने के लिए खाप पंचायतें उल्टे सीधे सुझाव दे रही है लेकिन लड़कियों और दलितों की सुरक्षा के बारे में कोई बात नहीं कर रही। उल्टे सीधे सुझाव देने की बजाय खाप पंचायतों को इसके बारे में कुछ करना चाहिए। खाप पंचायतों को उन लोगों के हाथ पैर तोड़ देने चाहिए जो दलित लड़कियों से रेप और यौन शोषण की कोशिश करें। 

राष्ट्रीय लोकदल ने यह रैली पार्टी के दिवंगत नेता देवीलाल की 99 वीं जयंती के मौके पर आयोजित की थी। पिछले महीने जिंद की खाप पंचायत ने कहा था कि फास्ट फूड खाने के कारण रेप की घटनाएं बढ़ रही है। इससे पहले एक खाप नेता ने कहा था कि रेप की घटनाओं के लिए लड़कियां ही जिम्मेदार है। उन्होंने सुझाव दिया था कि 15 साल की उम्र में ही लड़कियों की शादी करा देनी चाहिए।

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दूध,पानी,तेल की खुली बिक्री पर बैन

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नई दिल्ली। पानी,नमक,चाय,मसाले,दाल,अनाज,दूध,घी,खाद्य तेल,सीमेंट और कपडे धोने का पाउडर जैसी रोजमर्रा की वस्तएं अब खुली नहीं मिलेगी। सरकार ने गुरूवार को बताया कि दिन प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली 19 वस्तुओं की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इनकी पैकिंग का आकार निश्चित कर दिया गया है।

सरकार के अनुसार पैकिंग के मानक तय कर दिए गए हैं और इन वस्तुओं की पैकिंग 50 ग्राम, 100 ग्राम और इसके गुणक, एक किलोग्राम और इसके गुणक तथा 10 किलोग्राम और इसके गुणक में ही की जाएगी। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि 31 अक्टूबर 2012 पहले से बाजार में आ चुकी वस्तुओं की गैर मानक पैकिंग इसकी अपवाद रहेगी। सरकार ने कहा है कि इन वस्तुओं की बिक्री और आयात निश्चित पैकिंग में ही करना होगा। सरकार ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्रित शासित प्रदेशों की सरकारों को सूचित कर दिया है और उचित कदम उठाने को कहा है। 

निर्देशों के अनुसार बेबी फूड, घी, मक्खन,खाद्य तेल, चावल, आटा, वनस्पति, बिस्किट और ब्रेंड की खुली बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। इनकी बिक्री 25 ग्राम से लेकर 10 किलोग्राम की पैकिंग में की जा सकती है। इनके अलावा 100 ग्राम तक मोटे अनाज और दाल की खुली बिक्री जा सकती है लेकिन इससे ज्यादा की मात्रा के लिए मानक पैकिंग की जरूरत होगी। इनकी पैकिंग 100 ग्राम से लेकर पांच किलोग्राम और इसके गुणक में जा सकती है। 

चाय और काफी की खुली बिक्री केवल 25 ग्राम तक होगी। इसके बाद इन्हें 50 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम के पैकेट में रखना होगा। पेय पदार्थो में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं और दूध पाउडर 50 ग्राम तक खुले बेचे जा सकते हैं। इसके बाद इन्हें 100 ग्राम और इसके गुणक की पैकिंग में बेचना होगा। नमक,साबुन और पेंट की न्यूनतम पैकिंग 50 ग्राम होगी और इसके बाद इसके गुणक की पैकिंग में उपभोक्ता को मिलेगा। पीने के पानी की पैकिंग 100 ग्राम से लेकर पांच लीटर तक की होगी और इसके बाद यह एक लीटर के गुणक में बेचा जाएगा। सीमेंट की पैकिंग एक किलोग्राम और इसके गुणक में होगी। 
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खाली पेट दुष्कर्म

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मनोरंजन ठाकुर 
जरा सोचिये। अभी-अभी फिर एक लड़की बलात्कार की शिकार हुई है। वह रो रही है। उसके सामने असंख्य प्रश्न मौन, बूत बने खड़े हैं। वह लड़की आगे चलकर कैसी पत्नी बनेगी। कैसी मां बनती होगी बड़ी होकर ऐसी लड़की। ैकैसे स्कूलों में कदम रखेगी ऐसी लड़की। अपने हम उम्र से क्या बात करेगी ऐसी लड़की। वह रातों को सोये में क्या सपना संजोयेगी। दिन के उजाले में किसके चेहरे को टटोलेगी, निहारेगी। अपने देश में हर वक्त, हर हमेशा इतने ज्यादे अन्याय होने लगे हैं कि संवेदनशील आदमी भी अन्यायों पर बोलना, उसके बारे में पढऩा, सुनना भी नहीं चाहता। हर आदमी आज तमाशाई हो गया है। खासकर, सेक्स व बलात्कार के मामले में। समाज उसे नंगी आंखों से देखता, परोसता, महसूसता हर दिन है लेकिन मौन एक मूक दर्शक बनकर। कुछ बोलने से परहेज, कुछ सोचने से तौबा। उस परिवार, उस लड़की के जीवन, घुटन को सीने में बलात छुपाये रखने की जद्दोजहद के बीच। किसी भी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देना आसान काम नहीं है। लेकिन जरा बलात्कार की घटना के बारे में सोचिये। यह रिवाल्वर व चाकू से किसी के मर्डर से ज्यादा भयानक व क्रूर ही नहीं है बल्कि इसकी प्रक्रिया से गुजरना आसान नहीं। पत्नी की रजामंदी के बगैर उससे सेक्स संबंध बनाना महज एक सामान्य आदमी के लिये सहज नहीं होता। बलात्कार की घटना को अंजाम देने वाले कहीं न कहीं से अतिरिक्त फोर्स जरूर रखते हैं जिसकी ताकत से वह किसी महिला या लड़की को हवस का शिकार बना लेते हैं। चोरी, डकैती व हत्या से भी ज्यादा टफ ये बलात्कार की घटनाओं को आज हर मोड़ पर खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। बाजारवाद का अहम हिस्सा आम आदमी है। इस बाजार ने भी खोज निकाला है महिलाओं पर हिंसा का अनोखा मजेदार खेल जिससे धृणित तरीका दूसरा कोई हो ही नहीं सकता। बच्चों, किशोरों की पीढ़ी को विकृत यौनकुत्सा में धकेलने वाला तरह-तरह के वीडियो गेम बाजार में बिक रहे हैं जो औरतों को सेक्स के लक्ष्य के रूप में पेश कर रहे हैं। विदेशों से पहुंच रहे ये खिलौने बच्चों के साथ उनके घरों में भी सुरक्षित स्थान बना लिया है। बच्चों में यौनकुंठा व अपराध की सीख देते ये खिलौने सेक्स को बहुत आसानी से परोस रहे हैं। बलात्कार की घटनायें, सेक्स की चटपटी बातें अब चटकारे की भी बात नहीं रही। यह हमारे दिनचर्या में शामिल है। हम सुकून में हैं आराम में हैं। कोई भी सार्थक सोच, एक माकूल हथियार हम आज तक खड़ा नहीं कर पाये इस अपराध, बलात्कार के खिलाफ। बच्चे घरों में ही यौनविकृति के शिकार हो रहे हैं। कामकाजी महिलायें बस स्टैंड पर दफ्तर में कहीं गलियों में रिक्शा, बस में हवस की शिकार हो रही हैं। घरेलू महिलायें फुटपाथ पर रोने को विवश है तो मासूम बच्चियां जो सही से चलना भी नहीं जानती, बोलना भी नहीं जानती अस्पताल के बिस्तरों पर सिसकती, लेटी मिलती है। महिलाओं व पूरी मानव सभ्यता के खिलाफ जो सबसे धृणित, कलंकित अपराध है वह कहीं वीडियो गेम का हिस्सा है तो कहीं राजनेताओं, अभिनेताओं, अय्याश हाकिमों तो कहीं आम इंसान की क्षणिक कलयुगी आवेग का शिकार जो पूरी जिंदगी की लहू को सफेद कर देता है। एक फिल्म आयी थी जख्मी औरत। बलात्कारियों के खिलाफ लड़ती औरतें। समाज को एक संदेश देती। अब दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने सांसदों को सलाह दी है। दुष्कर्म व यौन उत्पीडऩ की घटनाओं के खिलाफ शल्य चिकित्सा या रसायनों के जरिये बंध्याकरण जैसी वैकल्पिक सजा की संभावना तलाशने की। एक युवक अपनी नाबालिग सौतेली बेटी से दुष्कर्म के मामले में दस साल की सजा सुनता है। बेटियों पर पिताओं द्वारा लगातार वर्षों तक यौन शोषण या दुष्कर्म के बारे में खबरें आती ही रहती है। सोचिये, उस परिवार उस लड़की के बारे में। कैसे जिंदगी जीती होगी उस घर में वह लड़की। वह आगे चलकर क्या बनेगी। उसकी भूमिका समाज में किस रूप में निर्धारित हम करेंगे। इस घुटन से निकलने की राह कहां से निकलेगी। कोई रोशनी कहीं से आयेगी भी। कई मामले हैं जहां पत्नी बलात्कारी पतियों का साथ देते दिखती है। एसपी एस राठौड़, शाइनी आहूजा, पूर्व महानिरीक्षक रविकांत शर्मा खुशनसीब बलात्कारी हैं जिनका साथ उनकी धर्म पत्नी दे रही हैं। दिल्ली की अदालत ने बंध्याकरण को दुष्कर्म के मामले में एक बेहतर सजा का विकल्प माना है लेकिन यह महज विकल्प ही है कोई ठोस आधार, पहल नहीं। इस विकल्प से रोती-रूकी जिंदगी को रफ्तार, सुर्ख मुस्कान मिल जाये ये संभव नहीं। क्या हमें ऐसा नहीं लगता कि हम समाज में औरतों की चीख, जख्मी शरीर को देख खुश हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि हम कल होकर ऐसा सोचने लगें कि कहीं हम खुद तो दुष्कर्मी नहीं। जरा सोचिये, क्या आप भी कर सकते हैं- खाली पेट दुष्कर्म ।

(रफ़्तार 24 न्यूज़ के फेसबुक पेज पर मनोरंजन ठाकुर द्वारा प्रेषित)

लीक हुआ पूनम की फिल्म का पोस्टर

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पूनम की आने वाली एडल्ट फिल्म का पोस्टर लीक हो गया है। यह लीक हुआ है या जानबूझ कर लीक किया गया है इसे पूनम ही बता सकती हैं। इस पोस्टर के लीक होने की  चर्चा फिल्मी गलियारों में हो रही है। पूनम की यह तस्वीर बड़े अजीब कैमरा एंगल से ली गई है। 

कंट्रोवर्सी गर्ल पूनम पांडे ने बताया है कि उन्होंने एक एडल्ट फिल्म साइन की है। पूनम ने कहा था कि उनकी आने वाली फिल्म सिर्फ पांच अक्षरों से शुरू होती है पहला अक्षर ए है। दूसरा अक्षर एच है जिसके लिए उन्होंने लिखा है एच फॉर हैबिट यानी कि दर्शक उन्हें अपनी आदत बना ले।

तीसरा अक्षर है एस यानी सेक्स और चौथा अक्षर एन फॉर यानी न्यूड और पांचवा अक्षर 'ए' है यानी कि ए फॉर एप्पल? नहीं! अप्लाई ..टू माई बॉडी। पूनम ने आगे लिखा है कि अब तक उन्होंने अपनी फिल्म के पांचो अक्षर ए,एच,एस,एन और ए को पोस्ट कर दिया है। 

पूनम ने कहा है की अब आप लोगों को बताना है कि उनकी फिल्म का नाम क्या है। फिल्म का शीर्षक पांच अक्षरों से ही शुरू होता है। फिल्म का निर्देशन अमित सक्सेना कर रहे हैं। जिन्होंने जिस्म 2 का निर्देशन किया है।Source-amarujala

बिहार में डायन कहकर महिला की नाक काटी

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बिहार के खगड़िया जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें पंचायत की सदस्य को डायन कहकर उसकी नाक काट दी गई। पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। 

बेलदार पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष मुकेश कुमार झा ने बताया कि मंगलवार को पांच लोगों ने इस महिला को बुरी तरह पीटा। उनका मानना था कि यह महिला जादू टोना करती है और इस कारण हाल ही में इनमें से एक के बेटे की जान चली गई। पिटाई के बाद उन लोगों ने महिला की नाक काट दी। महिला को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़िता के बयान के आधार पर पांचों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। Source-amarujala

"सत्ता के लालची हो सकते हैं केजरीवाल"

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नई दिल्ली। अन्ना हजारे का कहना है कि केजरीवाल को पैसों का लालच नहीं है लेकिन उन्हें सत्ता का लालच हो सकता है। टीम अन्ना के पूर्व सदस्य केजरीवाल के राजनीतिक दल बनाने के बाद दोनों अलग हो गए थे। केजरीवाल एक के बाद एक खुलासों से सुर्खियां बटोर रहे हैं।


उल्लेखनीय है कि केजरीवाल में सत्ता की भूख होने का आरोप कई राजनैतिक दल लगाते रहे हैं लेकिन अब यह आरोप खुद अन्ना ने लगाया है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में अन्ना ने कहा कि केजरीवाल में पैसे का तो नहीं लेकिन सत्ता का स्वार्थ जरूर हो सकता है।


अन्ना ने केजरीवाल की तारीफ भी की फिर बाद में इशारों-इशारों में यह भी कह दिया कि केजरीवाल पहले के मुकाबले बदल गए हैं। एक न्यूज चैनल से बातचीत में 75 साल के अन्ना ने कहा कि केजरीवाल त्याग करने वालों में से हैं तथा वे घर के बारे में कभी इतना सोचते नहीं हैं जितना समाज और देश के बारे में सोचते हैं। 


केजरीवाल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिसा गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी,केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद व रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी को लेकर खुलासे कर चुके हैं। अन्ना ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। 

Source:PATRIKA

रफ़्तार 24 न्यूज़